12 रुपये के बकाया बिल के नाम पर 28 लाख की साइबर ठगी, ग्रीन गैस के नाम पर आगरा में गिरोह सक्रिय

आगरा, 23 सितम्बर। पुलिस प्रशासन और ग्रीन गैस लिमिटेड द्वारा लगातार आगाह किए जाने के बावजूद घरेलू गैस उपभोक्ताओं का साइबर ठगों के जाल में फंसना जारी है। शहर में ग्रीन गैस के नाम पर 18 से बीस लोग अब तक अब तक अपना धन गंवा चुके हैं। अब ग्रीन गैस का महज 12 रुपये का बकाया बिल चुकाने के नाम पर 28.19 लाख रुपये की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पहले बिल का झांसा दिया, फिर मोबाइल फोन पर APK फाइल और लिंक भेजकर पूरी कंपनी का खाता खाली कर दिया।
घटना के बाद साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। 
फोन पर आया 12 रुपये के बिल का मैसेज
पीड़ित के पास फोन आया कि उसका ग्रीन गैस का 12 रुपये का बिल बकाया है। भुगतान न करने पर कनेक्शन कटने की धमकी दी गई। छोटी रकम होने से पीड़ित को शक नहीं हुआ। इसके बाद ठगों ने बिल अपडेट और भुगतान के नाम पर मोबाइल पर एक लिंक और APK फाइल भेजी और इंस्टॉल करने को कहा। ठगों ने इसे कंपनी की आधिकारिक प्रक्रिया बताया।
गुप्त कोड डायल कराकर कराई कॉल फॉरवर्डिंग
असली खेल इसके बाद शुरू हुआ। पीड़ित से मोबाइल फोन पर एक गुप्त कोड डायल कराया गया, जिससे उसके नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव हो गई। इससे बैंकिंग से जुड़े सभी OTP और कॉल सीधे ठगों के नंबर पर जाने लगे। ठगों ने इसी का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बना ली।
तीन ट्रांजेक्शन में उड़ाए 28.19 लाख
ठगों ने एक साथ पूरी रकम नहीं निकाली। कंपनी के खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 28.19 लाख रुपये निकाल लिए गए। खाते से रकम कटने का मैसेज आने पर पीड़ित के होश उड़ गए और उसने तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क किया। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, भेजे गए लिंक, APK फाइल और कॉल फॉरवर्डिंग से जुड़े साक्ष्य खंगाल रही है।
APK फाइल बनी सबसे बड़ा खतरा
साइबर पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK फाइल इंस्टॉल न करें, कोई गुप्त कोड डायल न करें और कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव न करें। किसी भी बिल की पुष्टि कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से ही करें। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी में अब 'छोटी रकम' ही बड़ा जाल बन रही है। 12 रुपये के बहाने लाखों का चूना लगाया जा रहा है। जांच में पता लगाया जा रहा है कि 28.19 लाख किन खातों में ट्रांसफर हुए और गिरोह कहां से ऑपरेट हो रहा है।
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