कानपुर में ट्रेनी विमान हादसा: 20 मिनट की उड़ान के बाद खेत में गिरा चार सीटर विमान, दो पायलटों की मौत

कानपुर, 27 अगस्त। कानपुर के चकेरी स्थित फ्लाइंग एविएशन क्लस्टर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां गुरुवार दोपहर गर्ग एविएशन सेंटर का एक चार सीटर डुअल इंजन ट्रेनी विमान क्रैश हो गया। हादसे में विमान में सवार इंस्ट्रक्टर और ट्रेनी पायलट दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गर्ग एविएशन सेंटर का यह विमान VT-XXX रजिस्ट्रेशन का चार सीटर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट था। गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे इसने चकेरी एयरस्ट्रिप से रूटीन ट्रेनिंग फ्लाइट के लिए टेक ऑफ किया था।
विमान में दो लोग सवार थे - इंस्ट्रक्टर कैप्टन सचिन भाटिया, निवासी गुजरात और ट्रेनी पायलट अभिषेक पुजारी, निवासी कर्नाटक। टेक ऑफ के करीब 20 मिनट बाद ही विमान ने संतुलन खो दिया और कटरी क्षेत्र के नत्थूपुरा गांव के बाहर खेतों में आकर गिर गया।
धमाके से दहला गांव, खेत में बिखरा मलबा
प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों के मुताबिक, दोपहर करीब 11:50 बजे आसमान में एक विमान काफी नीचे उड़ता हुआ दिखा, जिसके इंजन से अजीब आवाज आ रही थी। कुछ ही सेकेंड में जोरदार धमाके के साथ वह खेत में गिर गया और उसमें आग लग गई। धमाका इतना तेज था कि दो किलोमीटर तक उसकी आवाज सुनी गई।
हादसे के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और एविएशन सेंटर को सूचना दी।
पुलिस और एविएशन सेंटर ने क्या कहा 
सूचना पर चकेरी थाने की पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस कमिश्नर कानपुर नगर रघुबीर लाल ने मीडिया को बताया, "हमें 12 बजे के करीब विमान क्रैश की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त मिला। दोनों पायलटों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।"
गर्ग एविएशन सेंटर के चीफ पायलट कैप्टन राजीव भल्ला ने मीडिया से कहा, "यह एक रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी थी। विमान की पूरी जांच के बाद ही उसे उड़ान की अनुमति दी गई थी। हादसा क्यों हुआ, इसके कारणों की आंतरिक समीक्षा की जा रही है। डीजीसीए को भी सूचित कर दिया गया है।"
जांच के बाद ही साफ होगी वजह
फिलहाल हादसे की असली वजह स्पष्ट नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि तकनीकी खराबी या इंजन फेल होने से यह हादसा हुआ हो सकता है। डीजीसीए की टीम कानपुर पहुंचकर मलबे की जांच करेगी और ब्लैक बॉक्स की तलाश करेगी, जिसके बाद ही हादसे की असली वजह सामने आ पाएगी।
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