जिला उपभोक्ता आयोग के सहारा समूह की कंपनियों के खिलाफ तीन अहम फैसले, ब्याज सहित भुगतान करने के आदेश
आगरा, 02 जुलाई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने निवेशकों की जमा पूंजी परिपक्वता के बाद भी न लौटाने पर सहारा समूह की कंपनियों (सहारा क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी लिमिटेड और सहारयन यूनिवर्सल मल्टीपरपज सोसायटी लिमिटेड) के खिलाफ तीन अहम फैसले सुनाए हैं।
आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने 29 जून को ये आदेश पारित किए। तीनों मामलों में विपक्षी कंपनियों की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते आयोग ने 19 फरवरी, 2024 को एकपक्षीय सुनवाई के आदेश पारित किए थे।उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के अंतर्गत दायर इन परिवादों में आयोग ने कंपनियों की सेवा में कमी को सिद्ध माना है।
तीनों मामलों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
अमित कुमार गुप्ता का मामला (परिवाद संख्या- 153/2023) परिवादी अमित कुमार गुप्ता ने सहारा क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी में 47 महीने तक प्रतिमाह 1000 रुपये के हिसाब से कुल 47,000 रुपये जमा किए थे। परिपक्वता तिथि 31.03.2021 को उन्हें 61,100 रुपये मिलने थे, लेकिन कंपनी ने भुगतान करने में टाल-मटोल की। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिन के भीतर जमा राशि 47,000 रुपये पर 29.04.2017 से भुगतान की वास्तविक तिथि तक 06 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित परिवादी को भुगतान करे।
परिवाद 154/2023 में, अनुज गुप्ता ने सहारा क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी के दो खातों में 73 माह तक प्रतिमाह 1000-1000 रुपये के हिसाब से कुल 1,46,000 रुपये जमा किए थे। 06.07.2021 को परिपक्वता धनराशि 2,78,378/- रुपये देय थी। कोर्ट ने कंपनी को आदेशित किया कि वह 1,46,000 रुपये की जमा राशि पर 29.04.2017 से 06 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ भुगतान सुनिश्चित करे।
वहीं परिवाद 155/2023 में, परिवादी अनुज ने सहारयन यूनिवर्सल मल्टीपरपज सोसायटी की ‘सुपर बी बी’ योजना में 21.06.2018 को 1,40,300 रुपये का निवेश किया था। 21.06.2021 को इसकी परिपक्वता राशि 3,18,736 रुपये थी। इस मामले में आयोग ने 1,40,300 रुपये की मूल धनराशि पर 21.06.2018 से 06 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया।
तीनों ही मामलों में आयोग ने माना है कि विधिक नोटिस मिलने के बावजूद प्रतिपक्षी कंपनी ने परिपक्वता धनराशि अदा न करके अनुचित व्यापार संव्यवहार कारित किया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मूल धनराशि और ब्याज के अलावा, सहारा प्रबंधन को प्रत्येक मामले में मानसिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये और वाद-व्यय (कानूनी खर्च) के मद में 5,000 रुपये भी 45 दिन के भीतर आयोग के खाते में डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने होंगे। यदि प्रतिपक्षीगण 45 दिन की निर्धारित अवधि के भीतर आदेश का पालन करने में चूक करते हैं, तो परिवादियों को उनकी संपूर्ण धनराशि पर 06 प्रतिशत के स्थान पर 09 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज प्राप्त करने का अधिकार होगा। अदालत ने परिवादियों को निर्देशित किया कि वे इस फैसले की प्रति अनुपालन हेतु स्पीड या रजिस्टर्ड पोस्ट के माध्यम से प्रतिपक्षीगण को भेजें।
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