आगरा में पशुपालन विभाग में 25 लाख का घोटाला! जिलाधिकारी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजी
आगरा, 02 जुलाई। पशुपालन विभाग की जांच कर रही तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में सामान खरीद को लेकर 25 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जांच समिति का कहना है कि जिला क्रय समिति से सामान खरीदने की अनुमति नहीं ली गई और मनमाने रेट पर सामान की खरीद की गई। यही नहीं, कुछ सामान की बिना खरीद के ही बिलों का भुगतान कर दिया गया। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट शासन में भेज दी है।
समिति ने पूर्व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जयंत यादव सहित कई अन्य को दोषी पाया है। वर्तमान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. डीके पांडेय की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगे हैं।
खबरों के मुताबिक, पशुपालन विभाग में हर साल ग्लव्स, गम बूट, प्लास्टिक की कुर्सी, रस्सा, मग सहित अन्य सामान की खरीद होती है। प्रत्येक सामान की खरीद की सूची बनाकर जिला क्रय समिति को भेजनी होती है। अनुमति मिलने के बाद सामान खरीदा जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 में बिना अनुमति के सामान की खरीद हुई है। इस वित्तीय साल में भी कुछ यही खेल हुआ है।
डिप्लोमा वेटेनरियन एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. सतीश चंद्र शर्मा ने डेढ़ साल पूर्व इसकी शिकायत मंडलायुक्त से की थी। तत्कालीन मंडलायुक्त शैलेंद्र सिंह के आदेश पर जांच शुरू हुई लेकिन फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जांच की गति धीमी होने की शिकायत शासन में की गई। जिलाधिकारी के आदेश पर एडीएम न्यायिक धीरेंद्र सिंह, उपायुक्त स्वरोजगार राजन राय और सहायक लेखाधिकारी अवधेश कुमार की निगरानी में कमेटी गठित की गई। कमेटी ने केंद्रीय भंडार पंजिका की जांच की गई। क्रय प्रक्रिया से संबंधित सभी मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.डीके पांडेय को भी जानकारी दी गई। इसके बाद भी एक भी दस्तावेज जांच कमेटी को नहीं मिला। जांच में पाया गया कि विभाग में 25 लाख रुपये का घोटाला हुआ है। इसमें पूर्व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जयंत यादव और पटल सहायक ज्ञानेंद्र भारद्वाज (दिवंगत) को जिम्मेदार ठहराया है। इसी 30 जून को जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कमेटी की रिपोर्ट शासन में भेज दी। अब शासनस्तर से कार्रवाई होगी।
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