आगरा में हैरतभरी घटना: मृत घोषित कर दी गई महिला सत्रह घंटे बाद जीवित हो उठी

आगरा, 30 जुलाई। बरेली के निजी अस्पताल में बुधवार की तड़के मृत घोषित कर दी गई 65 वर्षीया महिला के आगरा में अंतिम संस्कार किए जाने की तैयारियों के दौरान जीवित हो उठने का हैरतभरा मामला सामने आया है। महिला को परिजन ने तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना ट्रांस यमुना क्षेत्र की श्रीनगर कॉलोनी में विगत सायं घटी। महिला शीला देवी पत्नी स्व. हरिओम माहौर लीवर संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं। बरेली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टर ने बुधवार तड़के तीन बजे महिला को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद बेटा सुनील माहौर एंबुलेंस से उनका शव लेकर शाम करीब सात बजे आगरा स्थित घर पहुंचा। शव को घर के एक कमरे में जमीन पर रखा गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। फूल-मालाएं और अन्य सामान आ गया था। रिश्तेदार अंतिम विदाई के लिए पहुंचने लगे थे। इसी दौरान दामाद अंतिम प्रणाम करने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने सास के पैर छुए, महिला के शरीर में हलचल हुई और वह जीवित हो गईं।
बताया गया है कि शीला देवी का दूसरा बेटा संजीव माहौर बदायूं के एक निजी अस्पताल में कार्यरत है। करीब बीस दिन पहले शीला देवी इलाज के लिए उसके पास बदायूं गई थीं। इसके बाद बेटे ने गत सोमवार को उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर पर रखा गया। बुधवार तड़के करीब तीन बजे डॉक्टरों ने शीला देवी को मृत घोषित कर दिया था। 
मृत घोषित किए जाने के लगभग सत्रह घंटे बाद रात करीब आठ बजे उनके दामाद ने पैर छुए। इसी दौरान शीला देवी के शरीर में हलचल होने लगी। अचानक से उन्होंने दामाद का हाथ पकड़ लिया। कहा, “मुझे कहां लेकर जा रहे हो? तुम सब रो क्यों रहे हो? मैं जिंदा हूं, मरी नहीं हूं।” यह सुन परिवार के लोग हैरान रह गए। परिजन उन्हें आगरा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार चल रहा है।
शीला देवी के जीवित हो उठने की घटना को कोई दैवीय चमत्कार मान रहा है तो कोई चिकित्सकों की लापरवाही ठहरा रहा है। पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। 
_________________________________________

ख़बर शेयर करें :

Post a Comment

0 Comments