जिला क्रिकेट एसोसिएशन पर फिर उठे सवाल - आगरा में नीलामी कराने का औचित्य क्या था? वर्षों से अन्याय झेल रहे शहर के क्रिकेटर!

आगरा, 30 जुलाई। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा विगत दिनों यहां यूपी टी-20 लीग के लिए कराई गई नीलामी को लेकर क्रिकेट जगत से जुड़े कुछ और लोगों ने भी सवाल उठाए हैं। 
क्रिकेट प्रेमी बलदेव भटनागर ने सवाल किया कि जब नीलामी के लिए आगरा के दस खिलाड़ियों की सूची सार्वजनिक की गई थी तो उनका नाम नीलामी में क्यों नहीं बोला गया। उन्होंने कहा कि नीलामी से पहले सूची सार्वजनिक किए जाने पर लगा था कि शहर के खिलाड़ियों की किस्मत खुलने जा रही है, इससे न केवल क्रिकेट प्रेमियों में बल्कि खिलाड़ियों और उनके परिवारीजनों में उत्साह का संचार हुआ था, लेकिन खिलाड़ियों को नीलामी में शामिल न किए जाने से सभी की आशाओं पर गहरा तुषारापात हुआ।
उन्होंने जिला क्रिकेट एसोसिएशन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शहर के खिलाड़ियों को मौका ही नहीं दिया गया तो फिर इस नीलामी के तामझाम भरे आयोजन को आगरा में कराने का औचित्य क्या था। जिन दो खिलाड़ियों के चयन की बात कही जा रही है, वे तो पहले भी शामिल रह चुके हैं। भटनागर ने कहा कि बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर ही नहीं दिया जाएगा तो फिर टैलेंट हंट जैसे आयोजन करने का भी क्या लाभ है?
रेलवे से सेवानिवृत्त पूर्व क्रिकेटर अनवर खान ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पुरानी यादें ताजा करते हुए अनवर खान ने लिखा कि ऐसा होना कोई नई बात नहीं है, ज्योति वाजपेयी से पहले बशीर उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव थे। उनके देहांत के बाद वाजपेयी साहब सचिव बने। बशीर के नाम से उत्तर प्रदेश क्रिकेट चैंपियन प्रतियोगिता प्रारंभ हुई जिसको आगरा जिला क्रिकेट टीम ने लगातार 10 साल फाइनल खेला, नौ बार विजेता बना। अंतिम दो साल दीपक तिवारी के नाम से ट्रॉफी दी गई। तब भी आगरा से कोई रणजी ट्रॉफी में नहीं चुना गया था। 
केवल रोहित शर्मा चुना गया जो बॉम्बे के विरुद्ध मैच खेला। सर्वेश मध्यप्रदेश से खेला। रमन दीक्षित रेलवे की टीम में थे। बहुत बाद में मोहम्मद कैफ के स्थान पर परमिंदर सिंह खेला। कैफ भारतीय टीम में थे। अनवर खान ने कहा कि इस अन्याय को आगरा के खिलाड़ियों ने बहुत झेला है।
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