नेशनल चैम्बर का दावा- रंग लाये प्रयास, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से उद्यमियों को मिली राहत, 400 आवेदकों के बारे में सीईसी, टीटीजेड और नीरी को निर्णय लेने का अधिकार

आगरा, 23 जुलाई। नेशनल चैम्बर सभागार में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 400 उद्योगों की राह आसान करने पर हर्ष व्यक्त किया गया। चैम्बर अध्यक्ष मनोज बंसल ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि उक्त आदेश जिले के उद्योगों के विकास के लिये बहुत की कारगर सिद्ध होगा। टीटीजेड से ग्रसित उद्यमियों एवं व्यापारियों को इससे राहत प्राप्त होगी। उन्होेंने इस आदेश के बारे में अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा चर्चा की गयी कि टीटीजेड के लिये असेसमेंट स्टडी और विजन डॉक्यूमेंट में देरी की वजह से लम्बित औद्योगिक आवेदनों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता। इसलिये सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णय लिया गया कि टीटीजेड अथोरिटी लम्बित आवेदन पर प्रोसेस सकती है। कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी), सेन्टल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) और टीटीजेड अथोरिटी  किसी आवेदन पर सहमत है तो टीटीजेड अथोरिटी बिना कोर्ट जाये लम्बित आवेदनों पर अनुमोादन कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि अंतिम फैसला लेने से पहले हर मंजूरी को सीईसी की बेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिये।
उन्होंने कहा कि टीटीजेड में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को मंजूरी नहीं दी जायेगी। यदि किसी विशेषज्ञ को किसी उद्योग के गैर-प्रदूषणकारी होने पर आपत्ति होगी, तो उस आवेदन पर अंतिम निर्णय सर्वाेच्च न्यायालय की अनुमति से ही होगा। साथ ही सभी स्वीकृतियों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा ताकि पारदर्शिता एवं जनसहभागिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 400 आवेदन की सूची में चैम्बर द्वारा भेजी गयी सूची को भी सम्मिलित किया गया है। 
हर्ष व्यक्त करने वालों में नितेश अग्रवाल, अम्बा प्रसाद गर्ग, विनय मित्तल, सीताराम अग्रवाल, अनिल वर्मा, मनीष अग्रवाल, अतुल गुप्ता, मनोज गुप्ता, देवेन्द्र गोयल, राजेन्द्र अग्रवाल, विकास मित्तल, केशव दत्त गुप्ता, धर्मगोपाल मित्तल, सचिन सारास्वत, मयंक अग्रवाल, अखिलेश दुबे नरेन्द्र गुप्ता, राजकिशोर खंडेलवाल शामिल हैं।
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