उपभोक्ता आयोग प्रथम ने ब्लिंकिट के खिलाफ दिया आदेश, अवैध वाउचर मामले में रिफंड दे कंपनी, जुर्माना भी
आगरा, 21 मई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट (ग्रोफर्स इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने ब्लिंकिट को आदेश दिया कि वह परिवादिनी राधिका मोदगिल को उनके द्वारा खरीदे गए कैंडेरे गोल्ड ज्वैलरी गिफ्ट वाउचर की पूरी राशि छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस करे। आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए पांच हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये का हर्जाना देने का भी निर्देश दिया है।
अप्रैल 2025 में केदार नगर की निवासी राधिका मोदगिल ने ब्लिंकिट प्लेटफॉर्म से 4,900/- रुपये का एक सोने के आभूषण का गिफ्ट वाउचर खरीदा था, जिसकी वैधता अक्टूबर 2025 के अंत तक थी।
जब परिवादिनी ने अक्टूबर के मध्य में इस वाउचर के माध्यम से सोने का सिक्का खरीदने का प्रयास किया, तो प्लेटफॉर्म पर वाउचर को अमान्य (इनवैलिड) घोषित कर दिया गया।
इसकी शिकायत ब्लिंकिट के कस्टमर केयर और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर की, लेकिन कंपनी ने नया वाउचर जारी करने या पैसे वापस करने से इनकार कर दिया। कंपनी का तर्क था कि वाउचर एक तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी गिफ्टर) वाउचाग्राम इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित था, इसलिए उनकी कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती है।
उपभोक्ता आयोग ने ब्लिंकिट के इन तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के प्रावधानों के तहत ई-कॉमर्स और ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म अपने दायित्वों से यह कहकर नहीं बच सकते कि उन्होंने वाउचर केवल बेचने के लिए एक माध्यम प्रदान किया था।
यदि कोई सामान या वाउचर उनकी वारंटी अथवा वैधता अवधि के भीतर काम नहीं करता है, तो वह सेवा में कमी की श्रेणी में माना जाएगा।
आयोग ने अपने फैसले में कंपनी को निर्देशित किया है कि वह निर्णय की तारीख से 45 दिनों के भीतर पूरी धनराशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से आयोग के खाते में जमा कराए। यदि कंपनी तय समय सीमा के भीतर इस आदेश का पालन करने में विफल रहती है, तो ब्याज की दर छह प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी।
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