"रसूखदारों के सामने हैसियत कीड़े-मकोड़ों जैसी हो गई इसलिए 'कॉकरोच' बनकर आए"
आगरा, 26 मई। जिला कलक्ट्रेट पर मंगलवार को अजीब दृश्य था। व्हीलचेयर पर बैठा एक युवक शरीर पर शिकायतों की लंबी लड़ियां लिए हुए था। ये लड़ियां व्हीलचेयर से बंधी हुई थीं। यही नहीं उसने व्हीलचेयर पर “मैं हूं कॉकरोच” का पोस्टर भी चिपका रखा था। उसके साथ आया दूसरा युवक भी खुद को “कॉकरोच” बताकर जिला प्रशासन के सामने इंसाफ मांग रहा था। उनका कहना था कि सिस्टम गरीब इंसान को इंसान समझने को तैयार नहीं है।
मिढ़ाकुर निवासी जोगेंद्र ने मीडिया को बताया कि वह कभी कमर्शियल वाहन चलाकर परिवार चलाते थे। आरोप है कि एक निजी स्कूल संचालक ने उनसे जबरन बेलदारी कराई। इसी दौरान छत से गिरा भारी पत्थर उनकी रीढ़ की हड्डी पर आ गिरा। परिवार की दुनिया उसी पल बदल गई। स्कूल संचालक के कहने पर उन्हें खेरिया मोड़ स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। ऑपरेशन हुआ, लेकिन जोगेंद्र हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गए। जोगेंद्र का आरोप है कि जब उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत की, तो निष्पक्ष जांच की जगह कागजों में पूरा मामला ही बदल दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि सीएमओ कार्यालय ने बिना शारीरिक जांच किए डाक से रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि जोगेंद्र को पहले से लकवा था और वह घर पर गिरकर घायल हुए थे। इस रिपोर्ट ने न सिर्फ उनकी शिकायत कमजोर कर दी, बल्कि जिंदगी भी तोड़ दी। आर्थिक तंगी, इलाज का अभाव और मानसिक तनाव के बीच उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई। आज हालत यह है कि उनके दोनों पैरों में गंभीर संक्रमण फैल चुका है और वह व्हीलचेयर पर बैठकर कलक्ट्रेट में न्याय की भीख मांग रहे हैं।
दूसरे पीड़ित जयप्रकाश ने सौफुटा रोड स्थित ‘श्रीजी हॉस्पिटल’ पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि डॉक्टरों ने उनकी बहन कविता को बिना टीबी हुए ही टीबी की भारी दवाएं दे दीं। जब हालत बिगड़ी तो परिवार उसे एसएन मेडिकल कॉलेज समेत शहर के कई बड़े अस्पतालों में लेकर गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि युवती को टीबी थी ही नहीं। जयप्रकाश का आरोप है कि गलत इलाज के कारण उनकी बहन मानसिक संतुलन खो चुकी है। जयप्रकाश का दावा है कि सीएमओ की जांच कमेटी ने डॉक्टरों को दोषी माना था, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई। उनका आरोप है कि रसूख और पहुंच के चलते फाइल दबा दी गई। अब हालत यह है कि शिकायतकर्ता को ही थाने और दफ्तरों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं, जबकि आरोपी खुलेआम धमकियां दे रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे युवकों से पूछा गया कि उन्होंने खुद को “कॉकरोच” क्यों कहा, तो उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल से दफ्तर-दफ्तर भटक रहे हैं। गरीब आदमी की कोई सुनवाई नहीं है। रसूखदारों के सामने हमारी हैसियत कीड़े-मकोड़ों जैसी हो गई है। इसलिए आज कॉकरोच बनकर आए हैं, ताकि शायद सिस्टम को हमारी हालत दिखाई दे जाए।
__________________________________________

Post a Comment
0 Comments