आईएमए की जिला प्रशासन से गुहार- रिहायशी इलाकों में जनता के इलाज को बंद न कराएं || सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई कर रही आवास विकास परिषद
आगरा, 30 अप्रैल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कि जिला शाखा ने आवास विकास परिषद द्वारा रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे अस्पतालों को दिए गए नोटिसों पर चिंता व्यक्त करते हुए हम शासन, प्रशासन से जनता के इलाज को बंद न करने की गुहार लगाई है।
अध्यक्ष डा पंकज नागायच ने कहाकि अस्पताल गतिविधियों को “व्यावसायिक गतिविधि” बताते हुए बंद करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, विशेषकर जब इसे हाल के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में लागू किया जा रहा है। हॉस्पिटल बंद होने से जनता बेहाल होने लगेगी!
सचिव डा रजनीश मिश्रा ने कहाकि चिकित्सा सेवाएं कोई सामान्य व्यापार नहीं हैं, बल्कि यह एक अत्यावश्यक और मानवीय सेवा है, जो समाज के हर वर्ग के जीवन से सीधे जुड़ी हुई है। इस प्रकार के नोटिस न केवल चिकित्सकों के मनोबल को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम जनता की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को भी गंभीर रूप से बाधित करते हैं। कोषाध्यक्ष डा मुकेश भारद्वाज ने जिला प्रशासन से मांग की कि इस विषय में तुरंत स्पष्टता प्रदान की जाए और ऐसे सभी नोटिसों को वापस लिया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकें। आईएमए ने कहा कि संस्था के प्रतिनिधि सभी जनप्रतिनिधियों से भी समस्या के समाधान के लिए मिलेंगे।
निजी और सरकारी अस्पतालों में संचालित आईसीयू पर भी बड़ा संकट
एक अन्य खबर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद जिले के निजी और सरकारी अस्पतालों में संचालित आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने शहर के करीब 150 अस्पतालों के आईसीयू की व्यापक जांच का फैसला लिया है, जो मई माह में शुरू होगी। जिन अस्पतालों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं पाया जाएगा, वहां गंभीर मरीजों की भर्ती पर रोक लग सकती है। इससे शहर की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत आईसीयू संचालन के लिए अब सख्त मानक लागू किए गए हैं। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, पर्याप्त वेंटिलेटर और अन्य लाइफ-सेविंग उपकरण अनिवार्य कर दिए गए हैं। साथ ही, तीन मरीजों पर कम से कम एक नर्स की तैनाती जरूरी होगी। एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि आईसीयू किसी भी स्थिति में बेसमेंट में संचालित नहीं किया जा सकेगा। इसके पीछे सुरक्षा कारण और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को तत्काल बाहर निकालने की सुविधा को ध्यान में रखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, करीब 80 अस्पताल और लैब ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक ऑनलाइन आवेदन नहीं किया है, जिससे उनका पंजीकरण खतरे में पड़ गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध पंजीकरण और मानकों के आईसीयू संचालन पूरी तरह अवैध माना जाएगा।
__________________________________________
Post a Comment
0 Comments