काम आया मेयर का दांव: सड़क निर्माण भ्रष्टाचार में नगर निगम के एक्सईएन, एई, जेई व सुपरवाइजर दोषी, नगर आयुक्त ने शासन से आए पत्र के बाद कराई जांच
आगरा, 25 अप्रैल। हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी जाने वाले मार्ग में हुए भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने के बाद, शासन द्वारा उक्त प्रकरण की जांच कराने के निर्देश पर नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल द्वारा जांच कराई गई, जिसमें तत्कालीन अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता, वर्क सुपरवाइजर व कार्यदायी फर्मों पर गाज गिरी है। दोनों फर्मों पर अर्थदंड लगाया गया है और नगर आयुक्त द्वारा प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने की संस्तुति की गई है।
मीडिया में प्रकाशित उक्त भ्रष्टाचार का संज्ञान लेते हुए महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने नगर आयुक्त को थर्ड पार्टी जांच कराने के लिए पत्र लिखा था, जांच में अधिकारियों द्वारा सहयोग न किए जाने पर महापौर ने पार्षदों की टीम गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए थे, जिसमें पार्षदों द्वारा निर्माण कार्य में गड़बड़ी की आशंका जाहिर की गई थी और थर्ड पार्टी जांच कराने की संस्तुति की गई थी। इसके बाद महापौर द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के विशेष सचिव द्वारा उक्त प्रकरण पर नगर निगम आगरा से संज्ञान लिया गया था।
इस क्रम में नगर आयुक्त द्वारा कार्य की माप, गुणवत्ता एवं अभिलेखों की सत्यता की जाँच प्रभारी मुख्य अभियन्ता, नगर निगम, आगरा एवं स्वतंत्र तृतीय पक्ष के रूप में मैसर्स बीएलजी कन्स्ट्रक्शन सर्विसेज प्रा.लि. से अभिलेखीय परीक्षण, तकनीकी परीक्षण एवं स्थलीय निरीक्षण कराते हुए तथ्यात्मक जाँच कराई गई।
जांच में पाया गया कि हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी की ओर जाने वाला मार्ग अत्यंत जर्जर अवस्था में था। नागरिक सुविधा एवं यातायात सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत दो पृथक कार्य (1) सड़क चौड़ीकरण एवं ब्लैक टॉपिंग रु 53.92 लाख (लम्बाई-1300.00 मी) तथा (2) साइड पटरी पर इंटरलॉकिंग टाइल्स रु० 79.37 लाख (लम्बाई 1300.00 मी) के आगणन तैयार कर समिति से विधिवत स्वीकृति प्राप्त की गई। तत्पश्चात नियमानुसार ई-टेंडरिंग द्वारा कार्य संपादित कराए गए। समिति के कार्यवृत्त में संयुक्त कार्य का उल्लेख केवल टंकण त्रुटिवश हुआ था, जिसका न तो निविदा प्रक्रिया से कोई संबंध है और न ही इससे कोई वित्तीय प्रभाव पड़ा। दोनों कार्य नियमानुसार ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से संपादित कराए गए। समिति के कार्यवृत्त में संयुक्त कार्य का उल्लेख केवल टंकण त्रुटिवश अंकित हुआ था, जिसका निविदा प्रक्रिया अथवा वित्तीय स्वीकृति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
स्वीकृत कार्यस्थल से एक किलोमीटर दूर बनाई 25 मीटर सड़क
पत्रावलियों के परीक्षण में पाया गया कि सड़क चौड़ीकरण एवं ब्लैक-टॉपिंग कार्य के अंतर्गत प्रश्नगत स्थल पर कार्य आंशिक रूप से अवशेष था, जिसे पूर्ण कराये जाने हेतु क्षेत्रीय पार्षद, स्थानीय व्यापारियों एवं जनमानस के अनुरोध के दृष्टिगत आगणन में वृद्धि का औचित्य दर्शाते हुए पुनरीक्षित आगणन की स्वीकृति प्राप्त की गयी। तथापि, स्थलीय निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि स्वीकृत कार्यस्थल के स्थान पर उससे लगभग 1.00 किमी दूरी पर 25.00 मीटर सड़क निर्माण कार्य कराया गया है। साथ ही कार्यों की गुणवत्ता / वर्कमैनशीप भी ठीक नहीं पाये जाने के दृष्टिगत मै. अक्षत कन्स्ट्रक्शन प्रो. राम प्रकाश अग्रवाल एवं मै. एसके विरानी प्रो. एसके विरानी को अंतिम चेतावनी/नोटिस निर्गत करते हुए अर्थदण्ड आरोपित किये जाने की कार्यवाही की गई है। अन्यथा की स्थिति में फर्मों को कालीसूची में इन्द्राज किये जाने की कार्यवाही की जायेगी।
नगर आयुक्त द्वारा शासन को लिखा गया है कि उक्त तथ्य स्पष्ट रूप से इंगित करते हैं कि सम्बन्धित वर्क-सुपरवाइजर, अवर अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता द्वारा कार्य में शिथिलता बरते जाने, भ्रामक एवं तथ्यविहीन विवरण प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त की गयी, फलस्वरूप कार्य को स्वीकृत स्थल से भिन्न स्थान पर संपादित कराया गया, जो कि गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता की श्रेणी में आता है। साथ ही, इस प्रकरण में अधिशासी अभियन्ता द्वारा समुचित पर्यवेक्षण न किया जाना भी दायित्वहीनता को प्रदर्शित करता है। अतः उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर सम्बन्धित तत्कालीन वर्क-सुपरवाइजर, अवर अभियन्ता, पवन कुमार, सहायक अभियन्ता, एसएन सिंह एवं रविन्द्र कुमार सिंह, अधिशासी अभियन्ता के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय कार्यवाही किये जाने की संस्तुति की जाती है।
पूरे प्रकरण के दौरान खूब हुई थी खींचतान
हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी रोड में हुए भ्रष्टाचार के प्रकरण को लेकर खूब खींचतान हुई थी। पूरे प्रकरण के दौरान महापौर व नगर आयुक्त खेमे का विवाद खुलकर सामने आया था। प्रकरण उजागर होने के बाद नगर निगम द्वारा मौके पर लीपापोती का कार्य भी शुरू किया गया था, जिसे महापौर ने खुद पहुंचकर काम को रुकवा दिया था। इसके बाद महापौर के निजी सचिव हर्ष दिवाकर पर भी कथित तौर पर सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम के साथ अभद्रता करने के आरोप लगे थे। इस पर नगर निगम में काफी हंगामा हुआ था, कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शन भी किया गया था। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त के हस्तक्षेप के बाद समझौता हुआ था। बाद में भी छिटपुट कोल्ड वार जारी रहा।
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