तनातनी दिखी चरम पर, बिना अधिकारियों और एजेंडे के चला नगर निगम का सदन, नगरायुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित, मुख्यमंत्री को भेजेंगी महापौर

आगरा, 23 मार्च। नगर निगम में महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच चल रही तनातनी सोमवार को चरम पर दिखाई दी। महापौर ने बिना किसी निर्धारित एजेंडे के नगर निगम सदन की कार्यवाही शुरू की। सदन में पार्षदों ने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल की अनुपस्थिति को लेकर जमकर नारेबाजी की और इसे पार्षदों ने अपमान करार देते हुए उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव पर 72 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए। हालांकि विपक्ष ने पूरे प्रकरण को भारतीय जनता पार्टी और प्रदेश सरकार की विफलता बता दिया। चर्चा के बीच असंतोष जताते हुए बसपा पार्षदों ने सदन से वॉकआउट किया। बिना एजेंडा सदन होने के कारण विकास कार्यों पर चर्चा नहीं हो सकी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महापौर ने कहा कि इस निंदा प्रस्ताव को उचित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा सर्वोपरि है। अधिकारी का सदन से नदारद रहना जनप्रतिनिधियों की अनदेखी है। डायस पर भी सिर्फ महापौर बैठीं रहीं। नगर आयुक्त या कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
इस दौरान महापौर ने कहा, सदन में पार्षद भी हैं और मैं भी हूं लेकिन यहां एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार है, जब सदन की बैठक के दौरान नगर निगम का एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। अधिकारी सरकार के विरुद्ध काम कर रहे हैं। सरकार को इसकी सूचना होनी चाहिए। मैं इसकी शिकायत शासन और सरकार दोनों से करुंगी। फिलहाल मैंने मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव नगर विकास, डीएम को बता दिया है। उन्होंने कहा कि यदि यह लगता है मेरी अधिकारियों से नहीं बनती है तो यही सही, मेरी ऐसे अधिकारियों से कभी नहीं बनेगी क्योंकी जनता के कार्यों को करने के लिए यहां हूं।
बता दें कि महापौर ने सोमवार को नगर निगम सदन की बैठक बुलाई थी। रविवार की शाम तक किसी पार्षद के पास नगर निगम प्रशासन की तरफ से न तो सदन की बैठक की सूचना दी गई और न ही एजेंडा भेजा गया। उधर, महापौर की तरफ से सभी पार्षदों को सोमवार सुबह 11 बजे से सदन की सूचना दे दी गई। इस पर भाजपा और बसपा के लगभग अस्सी पार्षद पहुंच गए। लगभग आधा घंटा इंतजार किया गया लेकिन एक भी अधिकारी या कर्मचारी सदन में पहुंचा। बाद में बताया गया कि नगर निगम की ओर से सदन की बैठक नहीं है। इसके पीछे तर्क दिया गया कि संसद की कार्यवाही चल रही है, ऐसे में नगर निगम का सदन नहीं हो सकता। अधिकारी उस शासनादेश का हवाला दे रहे हैं, जिसमें लोकसभा या विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नगर निगम सदन आयोजित न करने की बात कही गई है। 
इससे पार्षदों का पारा हाई हो गया। उनका कहना था कि जब सदन नहीं बुलाया था तो समय पर इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई। भाजपा पार्षदों के साथ-साथ बसपा के पार्षदों ने भी अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया। 
सदन में हंगामे के बीच बसपा पार्षदों ने भाजपा पर तीखा प्रहार किया। बसपा दल के नेता ने कहा कि यह विवाद भाजपा के ट्रिपल इंजन सरकार की विफलता का प्रमाण है। इस पर भाजपा पार्षद भड़क गए। महापौर ने भी बसपा पार्षदों से इस मामले में माफी मांगने को कहा। इस पर बसपा का एक ग्रुप बैठक छोड़कर बीच में से ही चला गया। अधिकांश पार्षदों ने क्षेत्र में विकास कार्य न होने पर नाराजगी जताई। 
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