चैंबर चुनाव में घमासान चरम पर, प्रत्याशियों ने रात-दिन एक किए, ध्रुवीकरण के प्रयासों पर जोर, कल शनिवार को मतदान

आगरा, 13 मार्च। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी के वार्षिक चुनावों के लिए मतदान के लिए चौबीस घंटे का समय शेष रह जाने के साथ ही प्रत्याशियों के बीच मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का घमासान चरम पर पहुंच गया है। मतदान शनिवार 14 मार्च को वाटर वर्क्स चौराहे के निकट स्थित अग्रवन में होगा। सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर तीन बजे तक मतदान के बाद वोटों की गिनती होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
मुख्य मुकाबला अध्यक्ष पद को लेकर है। इस पद पर मनोज बंसल और मनोज गुप्ता दो प्रत्याशी हैं और दोनों ही दिन-रात एक किए हुए हैं। मनोज बंसल के पैनल में उपाध्यक्ष के दो पदों के लिए अम्बा प्रसाद गर्ग, नीतेश अग्रवाल और कोषाध्यक्ष पद के लिए विनय मित्तल शामिल हैं। दूसरी ओर मनोज गुप्ता के पैनल में उपाध्यक्ष पद के लिए गिरीश गोयल और कोषाध्यक्ष पद के लिए सतीश अग्रवाल शामिल हैं।
दोनों ही पैनलों को चैंबर के वरिष्ठ सदस्यों के दो ग्रुपों का समर्थन प्राप्त है। प्रत्याशियों के साथ इन वरिष्ठ सदस्यों ने भी इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। दोनों पैनलों द्वारा बड़े व्यापारिक संगठनों को अपने पाले में करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों में अपने समर्थकों को मजबूत किया जा रहा है। हींग की मंडी, किनारी बाजार से लेकर फाउंड्री नगर, हाथरस रोड, नुनिहाई, कमलानगर, बल्केश्वर, सिकंदरा, अरतौनी, रुनकता, फतेहाबाद रोड, एमजी रोड, संजय प्लेस और जीवनी मंडी जैसे क्षेत्रों के उद्यमियों और व्यापारियों पर पकड़ बनाई जा रही हैं। क्षेत्रीय व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों को अपने पाले में खींचा जा रहा है। 
एक पैनल विजय नगर कालोनी स्थित एक हॉल को अपनी रणनीति का केंद्र बनाए रहा तो दूसरे पैनल ने कमलानगर बाईपास मार्ग स्थित एक होटल में बैठकों का दौर जारी रखा।
इन चुनावों में जातिगत समीकरणों को भी हवा दी जा रही है। शुरुआत में एक पैनल ने माथुर वैश्य समाज का पूर्ण साथ होने का दावा किया तो दूसरे पैनल ने इसके विपरीत ध्रुवीकरण का प्रयास शुरू कर दिया। यह देख पहले पैनल ने माथुर वैश्यों के अलावा भी सभी वर्गों का समर्थन होने का दावा कर दिया। चुनाव जातिगत न होने के समर्थन में अग्रवाल समाज के व्यापारियों के बयान भी दिलवाए गए, जैन समाज के प्रमुख व्यापारियों का भी साथ दिखा। अग्रवालों के बड़े धड़े से भी कोई जातिवाद न होने के बारे में शुक्रवार को बयान जारी कराने की तैयारी है।
इसके साथ ही प्रत्याशियों को लेकर काबिलियत का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया जा रहा है। इसे लेकर भी ध्रुवीकरण के प्रयास जारी हैं।
माना जा रहा है कि दोनों पैनलों के बीच सर्वाधिक कांटे की लड़ाई अध्यक्ष पद को लेकर ही है। फिलहाल दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला दिख रहा है। चैंबर के वरिष्ठ सदस्य भी स्पष्ट आकलन करने से बच रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण है कि मतदाता भी किसी एक के प्रति झुकाव दिखाने से बच रहे हैं। सभी प्रत्याशियों के समक्ष उनको ही वोट देने के वायदे किए जा रहे हैं।
पिछले चुनावों में प्रत्याशी रह चुके या अपना प्रत्याशी लड़ा चुके वरिष्ठ सदस्य भी अपने अनुभवों के आधार पर अपने चहेते प्रत्याशियों को रणनीति बनाने में पूरी मदद कर रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि किस ग्रुप की रणनीति अधिक सफल होती है। 
तो क्या डुप्लीकेट बन रहे चैंबर के परिचय पत्र?
जीवनी मंडी के एक व्यापारी ने गुरुवार को चैम्बर में शिकायती पत्र देकर चैंबर के परिचय पत्र डुप्लीकेट भी बनने का आरोप लगाया और चुनाव समिति से सावधानी बरतने की मांग की। चर्चा है कि कुछ उद्यमी या व्यापारी शनिवार को मतदान के दिन शहर से बाहर हो सकते हैं ऐसे लोगों के डुप्लीकेट परिचय पत्र बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 
चुनाव समिति ने इस शिकायत को गम्भीरता से लेते हुए सभी मतदाताओं से चैंबर परिचय पत्र के अलावा अन्य पहचान पत्र भी साथ लाने को कह दिया, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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