उद्यमियों ने रखी मांग- गेल गैस ऐसे प्रतिबंध न लगाए कि उद्योग एवं व्यापार बंद करने को मजबूर होना पड़े

आगरा, 25 मार्च। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी के जीवनी मंडी स्थित सभागार में उद्यमियों ने एकस्वर से मांग की कि गेल गैस लिमिटेड ऐसे प्रतिबंध न लगाए जिससे उद्योगों को स्थिति सामान्य होने तक अपना उद्योग एवं व्यापार बंद करने के लिए मजबूर होना पड़े। 
चैंबर से जुड़े उद्यमी गेल गैस के मार्केटिंग डीजीएम मदन मोहन के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में गैस उपभोक्ता इकाइयों को गेल गैस द्वारा भेजे गये नोटिस पर मंथन किया गया कहा गया कि गत छह माह की औसत खपत के 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति प्रतिबंध की सूचना के नोटिस गैस उपभोक्ता इकाइयों को भेजे जा रहे हैं।
बैठक में अध्यक्ष संजय गोयल और चैंबर गैस प्रकोष्ठ के चेयरमैन मनोज कुमार बंसल ने कहा कि 65 प्रतिशत विनियमन केवल आरएलएनजी आपूर्ति पर लागू होता है और टीटीजेड के यूपीएम ग्राहकों के लिए 1.1 एमएमएससीएमडी घरेलू गैस के आवंटन में कोई कटौती या प्रतिबंध नहीं है और गेल गैस द्वारा यह भी बताया गया है कि सभी यूपीएम ग्राहकों को पूर्व सूचनानुसार अपने 6 महीने के औसत गैस उपयोग की 80 प्रतिशत सीमा का पालन करना आवश्यक है।
मनोज बंसल एवं फाउंड्री एवं कास्टिंग्स प्रकोष्ठ के चेयरमैन सुनील सिंघल द्वारा गेल अधिकारियों को अवगत कराया गया कि टीटीजेड में कुल गैस अनुबंधों की लगभग 8 से 10 प्रतिशत मात्रा के ही गैस अनुबंध हैं। फाउंड्री उद्योगों के अधिकांश अनुबंध बहुत कम मात्रा के हैं, अर्थात प्रतिदिन 300 एससीएम (लगभग 1 सेमी)। टीटीजेड में फिरोजाबाद के उद्योगों की तुलना में इन लघु इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया निरंतर नहीं होती है। आगरा के लघु उद्योगों के बारे में वर्णित तथ्यों के आधार पर, यदि उनकी 6 महीने की औसत गैस खपत का 80 प्रतिशत की सीमा लागू की जाती है, तो उन्हें भारी नुकसान होगा। इसके अलावा, 6 महीने की औसत गैस खपत का 80 प्रतिशत की यह सीमा गैस आपूर्ति अनुबंध के दायरे से बाहर है और अनुबंध के पक्षों के बीच अनावश्यक विवादों को जन्म देगी।
उपाध्यक्ष विवेक जैन ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न मौजूदा स्थिति से संपूर्ण देश अवगत है, उद्योगों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक सभी सामग्रियों की आपूर्ति अनिश्चित हो गई है। ऐसी परिस्थितियों में गेल गैस लिमिटेड से अपेक्षा है कि वह ऐसे प्रतिबंध न लगाए जिससे उद्योगों को स्थिति सामान्य होने तक अपना उद्योग एवं व्यापार बंद करने के लिए मजबूर होना पड़े। टीटीजेड में एपीएम/घरेलू गैस का आवंटन माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार उद्योगों के अस्तित्व को बचाने के लिए किया गया था, न कि क्षमता विस्तार और क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले नए उद्योगों की स्थापना के लिए।
बैठक में ये सुझाव भी दिए गए- 
1. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संशोधित दिशानिर्देशों के अनुपालन में अन्य राज्यों के लिए लागू नियमों के अनुसार, 5000 रुपये प्रति दिन तक गैस की खपत करने वाली सभी इकाइयों के लिए गैस की खपत में कटौती नहीं की जानी चाहिए।
2. गैस आपूर्ति में कोई भी कटौती दैनिक अनुबंधित मात्रा के आधार पर की जानी चाहिए, न कि गैस की खपत के 6 महीने के औसत के आधार पर।
3. एपीएम गैस और स्पॉट आरएलएनजी सहित कोई भी अन्य गैस, टीटीजेड की गैस खपत करने वाली इकाइयों को उस मात्रा तक आपूर्ति की जानी चाहिए जो यूपीएम गैस की शुरुआत से पहले इकाइयों को आपूर्ति की जा रही थी।
गेल गैस के मार्केटिंग डीजीएम मदन मोहन ने बताया कि युद्ध की वर्तमान स्थिति को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा यह गजट निकाला गया है जिसके अनुपालन में गैस आपूर्ति उद्योगों में की जा रही है। चैम्बर द्वारा प्रेषित समस्या और सुझावों को उच्च स्तर पर अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित किये जाने का आश्वासन दिया गया। 
बैठक में निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही चैम्बर का एक प्रतिनिधिमंडल पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालेसिस सेल के महानिदेशक पी मनोज कुमार जी से नई दिल्ली में भेंट करेगा और उन्हें जिले के उद्योग एवं व्यापार की वस्तुस्थिति से अवगत करायेगा। 
बैठक में उपाध्यक्ष संजय कुमार गोयल, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, अमर मित्तल, अशोक गोयल, राजीव अग्रवाल, सदस्य नरेन्द्र तनेजा, अभिषेक अग्रवाल, आरएस कपूर, एमपी सिंह, गौरव अग्रवाल, अजय अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, अमित बंसल, अंकित दौनेरिया, संजय अग्रवाल, योगेन्द्र शर्मा, राकेश सिंघल, हरीश सुन्दरानी, संजय गर्ग, विवेक मित्तल, आकाश अग्रवाल, अनिल कुमार गर्ग, रोहित अग्रवाल, विनीत जैन, शैलेश अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, अनुराग बंसल, अंशुल कौशल, योगेश सिंघल, विनित अग्रवाल आदि उपस्थित थे। 
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