टकराव: मेयर का दावा- सदन की बैठक के दिन मौजूद लोग राजनीतिक कार्यकर्ता और पार्षदों के प्रतिनिधि थे, नगर निगम के केयर टेकर ने थाने से तहरीर ली वापस
आगरा, 26 मार्च। नगर निगम में महापौर और नगर आयुक्त के बीच चल रहा टकराव अभी थमा नहीं है। एक दिन पहले तक नगर निगम सदन में बाहरी लोगों को बुलाए जाने के आरोपों पर महापौर की ओर से कहा गया कि ये लोग बाहरी नहीं थे बल्कि भाजपा के कार्यकर्ता और विभिन्न पार्षदों के परिजन अथवा प्रतिनिधि थे। गुरुवार को इन लोगों ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी जनप्रतिनिधियों और उनके सहयोगियों को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। इस बीच दावा किया गया कि इस मामले को लेकर हरीपर्वत थाने में तहरीर देने वाले नगर निगम के केयर टेकर एवं सहायक अभियंता जीवेक ने अपनी तहरीर वापस ले ली। इस घटनाक्रम ने पूरे प्रकरण को और उलझा दिया है।
कथित तौर पर संदिग्ध बताए जाने गए विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कहा कि दिनांक 26 मार्च को विभिन्न समाचार-पत्रों में प्रकाशित खबर में उनकी सीसीटीवी फोटो प्रकाशित करके उन्हें नगर निगम के अधिकारियों द्वारा संदिग्ध बताया गया है, जबकि वे कोई संदिग्ध नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि वे सभी सदन में शामिल हुए पार्षदों, महापौर के बेटे, भाई, भतीजे व निजी सहायक भी हैं।
उधर नगर निगम के सहायक अभियंता/केयरटेकर जीवेक ने अपनी दी हुई तहरीर वापस लेते हुए हरीपर्वत थाना प्रभारी को लिखा कि उन्होंने यह तहरीर उच्च अधिकारियों के कहने पर दी थी और अब उस पर कोई कार्रवाई नहीं चाहते।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष अनुसूचित मोर्चा एवं महापौर प्रतिनिधि हर्ष दिवाकर ने कहा कि यह सब नगरायुक्त की सोची-समझी रणनीति है, जिससे जनप्रतिनिधियों को कमजोर कर मनमानी चलाई जा सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ उनके सहयोगियों का रहना स्वाभाविक है और इसे संदिग्ध बताना दुर्भावनापूर्ण है।
भाजयुमो के महानगर उपाध्यक्ष एवं वार्ड-25 की पार्षद मिथलेश मौर्या के प्रतिनिधि और पुत्र गोगा मौर्या ने बताया कि वे 23 मार्च को निगम कार्यों के सिलसिले में वहां गए थे।
वार्ड-96 की पार्षद के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य अपूर्व शर्मा ने कहा कि नगर निगम में फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को भी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया जा रहा है।
नगर निगम जलकल विभाग कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अमर डागौर ने भी खुद को संदिग्ध बताए जाने पर आश्चर्य जताया और कहा कि वे नियमित रूप से जनहित के कार्यों के लिए निगम जाते हैं।
वार्ड-50 की पार्षद सुनीता चौहान के पुत्र मनोज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि क्या अपनी मां का सहयोग करना अपराध है? वार्ड-25 के पार्षद के प्रतिनिधि व भाजयुमो के महानगर उपाध्यक्ष गोविंद कुशवाह ने कहा कि क्या नगरायुक्त हमें जनसेवा करने की सजा देना चाहते हैं।
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