चैंबर में अब विवाद खत्म करने के तरीकों पर उठे सवाल
आगरा, 22 मार्च। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी की कोर कमेटी की शनिवार को हुई बैठक में विवादों के समाप्त होने की घोषणा भले ही कर दी गई हो, लेकिन अंदरूनी गुटबाजी खत्म नहीं हुई है। विवादों को समाप्त करने के तरीकों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। चुनौती दी जा रही है। चैंबर संविधान को भी फिर से लिखने के सुझाव दिए जा रहे हैं।
वृद्धावस्था के कारण बैठकों में कम उपस्थित रहने वाले एक पूर्व अध्यक्ष ने चैंबर पूर्व अध्यक्षों के व्हाट्सएप ग्रुप पर सवाल उठाए। उन्होंने जानना चाहा कि अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मनोज गुप्ता के विषय में जो भी निर्णय लिया गया, वह न्याय संगत कहा जाएगा या नीति संगत कहा जाय या व्यवहार संगत? ये प्रश्नचिन्ह भविष्य बतायेगा।
इस पर एक पूर्व अध्यक्ष ने बैठक को "कॉकस आधारित" बता दिया। उन्होंने कहा कि चैंबर संविधान में अनुशासनात्मक कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। जब तक कमेटी 21 में से 15 लोगों की आवश्यकता को पूरी नहीं कर सकती तो कोई कार्रवाई कैसे की जा सकती है? यह लगभग असंभव है। संविधान को फिर से लिखना ही एकमात्र उपाय है।
इसके बाद एक अन्य पूर्व अध्यक्ष ने लिखा- हमारे ज्ञानी लोग अब क्या कहना और करना चाहते हैं अगर कोई इच्छा बाकी हो तो तर्कपूर्ण तरीके से बात की जा सकती है। यह भी लिखा गया कि सभी लोग कहते हैं हम चैंबर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे लेकिन इनका कोई जवाब नहीं देता। एक अन्य पूर्व अध्यक्ष ने लिखा कि विवाद खत्म होने के बाद अब इस तरह की बातों का कोई मतलब नहीं है, इनसे बचना चाहिए।
दरअसल कुछ पूर्व अध्यक्ष कोर कमेटी की बैठक के तौर- तरीकों को लेकर नाखुश हैं। उन्होंने चेयरमैन के नाराज होने पर भी सवाल उठाये और कहा कि जब कोर कमेटी की पहली बैठक में ही मनोज गुप्ता का पत्र आ गया था तो उसे आरंभ में ही क्यों नहीं रखा गया। एक-डेढ़ घंटे सदस्यों में बहस होने के बाद क्यों इस बारे में बताया गया, यदि पहले ही बता दिया जाता तो शायद कोई बहस नहीं होती और संभवतः दूसरी बैठक की भी नौबत नहीं आती। दूसरी बैठक में जब यह सवाल पुनः उठा तो इस्तीफे की धमकी दे दी गई। इससे आशंका है कि सबकुछ पहले से तय था।
बुजुर्ग सदस्य के हस्तक्षेप पर भी आपत्ति
दूसरी बैठक में एक बुजुर्ग सदस्य के अनावश्यक हस्तक्षेप पर भी आपत्ति की गई। मनोज गुप्ता पक्ष के एक सदस्य ने उनका विरोध करते हुए स्पष्ट रूप से कह दिया कि वे बीच में न बोलें और चेयर को संबोधित करके ही अपनी बात रखें। बता दें कि व्यापार से दूरी बना चुके ये पूर्व सदस्य कुछ साल पहले तक चैंबर में अधिक दखल रखते थे। बैठक के दौरान बुजुर्ग सदस्य ने मीडिया में बदनामी होने पर चिंता जताई और कुछेक सदस्यों को इसके लिए जिम्मेदार भी बता दिया। इस पर एक वरिष्ठ सदस्य ने उल्टा सवाल जड़ दिया कि बदनामी वाले काम ही क्यों होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना तथ्यों के किसी पर आरोप न लगाएं। चैंबर के संविधान में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। चुनावी नियमावली को भी और कड़ा बनाया जाना चाहिए।
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