चैंबर चुनाव: समय निकलने के बाद लिए नाम वापस, ग्रुप तीन और नौ में दो प्रत्याशियों ने बनाई ऊहापोह की स्थिति
आगरा, 11 मार्च। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी के चुनावों में कार्यकारिणी सदस्यों के दो ग्रुपों में नाम वापसी की सीमा पूरी होने के बाद एक-एक प्रत्याशी ने अपना नामांकन वापसी का पत्र दिया। चुनाव समिति के चेयरमैन मनीष अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की। हालांकि समय सीमा निकल जाने के कारण इन पर विचार नहीं किया गया।
समय सीमा निकलने के बाद ग्रुप तीन से अशोक लालवानी ने और ग्रुप नौ से केशवदेव गुप्ता ने नामांकन पत्र वापसी का पत्र चैंबर कार्यालय में जमा कराया। चैंबर अध्यक्ष और चुनाव समिति के पदेन सदस्य संजय गोयल ने भी इसकी पुष्टि की।
समझा जाता है कि ऐसी स्थिति में इन प्रत्याशियों का नाम मतपत्र से नहीं हटाया जाएगा। संविधानिक तरीके से प्रक्रिया पूरी की जाएगी और चुनाव परिणाम भी घोषित किया जाएगा। दोनों ग्रुपों के अन्य प्रत्याशियों के बीच ऊहापोह की स्थिति है। नाम वापसी का पत्र देने वालों से उनका मुकाबला बना रहेगा और माना जा रहा है कि किसी उलटफेर में ऐसे प्रत्याशी जीत गए तो उनकी विजय भी मान्य होगी।
बता दें कि चैंबर में कार्यकारिणी सदस्यों के लिए 14 ग्रुपों में चुनाव प्रस्तावित थे। इनमें से 12 ग्रुपों में नाम वापसी की सीमा तक सहमति बन गई। ग्रुप तीन और नौ में सहमति नहीं बनी। ग्रुप तीन में दो पदों के लिए चार प्रत्याशी और ग्रुप नौ में तीन पदों के लिए भी चार प्रत्याशी मैदान में बने रहे। नाम वापसी की समय सीमा निकलने के बाद अशोक लालवानी और केशवदेव गुप्ता ने नामांकन वापसी का पत्र दिया।
अब ग्रुप तीन में अशोक लालवानी के हटने के बाद भी मतदान की स्थिति बनी रहेगी, क्योंकि इस ग्रुप के दो पदों पर चार प्रत्याशी मैदान में हैं। ग्रुप नौ में तीन पदों के लिए केशवदेव के अलावा तीन प्रत्याशी और हैं।
पता चला है कि ग्रुप नौ में पवन अग्रवाल और केशवदेव गुप्ता के बीच दोनों में से एक के ही चुनाव लड़ने पर सहमति बन गई थी। दोनों के बीच पर्ची डाल कर किसी एक के मैदान में बने रहने का फैसला हुआ और यह पर्ची पवन अग्रवाल के पक्ष में निकली। दोनों ही प्रत्याशियों ने "न्यूज नजरिया" से इसकी पुष्टि की। इसके बाद केशवदेव गुप्ता ने अपना नामांकन पत्र वापस लेने का निर्णय लिया, लेकिन निजी कारणों से उन्हें चैंबर कार्यालय पहुंचने में विलंब हो गया और वापसी की समय सीमा निकल गई।
केशवदेव गुप्ता का कहना है कि यदि मतदान के लिए मतपत्र दिए गए और उसमें चारों प्रत्याशियों के नाम हुए तो हालात दूसरे होंगे। अब भी यदि विशेष परिस्थितियों में चुनाव समिति या कोर कमेटी उनके नामांकन वापसी के पत्र को स्वीकार कर ले तो वे चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। या फिर ग्रुप नौ के मतपत्र ही मतदाताओं को न दिए जाएं क्योंकि उनके हटने की स्थिति में चुनाव की जरूरत ही नहीं रह जाती है। उन्होंने कहा, "यदि ग्रुप में एक प्रत्याशी के स्वेच्छा से हटने पर सर्वसम्मति बन रही है तो चुनाव समिति को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।"
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