जूता उद्यमियों का विवाद अदालत में, राजेश खुराना की अर्जी पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आदेश

आगरा, 13 फरवरी। जूता उद्यमी द्वारा कथित उगाही, फर्जी बकाया दिखाकर मानसिक उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी के आरोपों के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाना सिकंदरा को आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए हैं।
यह जानकारी एचके-एचआर इंटरनेशनल एक्सपोर्ट पार्क के संचालक राजेश खुराना ने दी। खुराना ने बताया कि उन्होंने अपने अधिवक्ता अनिल अग्रवाल के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किया था, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका लेन-देन फर्म एस के एंटरप्राइजेज और एस के सेल्स कार्पोरेशन से रहा था। संबंधित बकाया राशि 31 मार्च, 2020 तक समायोजित कर समाप्त कर दी गई थी तथा आयकर अभिलेखों में भी इसका समुचित उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद आरोप है कि इन फर्मों के साझीदारों सौरभ जैन, सुरेंद्र कुमार जैन एवं अंशुल जैन ने कथित रूप से एक वसूली संस्था SUPPORT@CREDITQ.IN के माध्यम से दबाव बनाना शुरू किया।
खुराना ने आरोप लगाया कि 21 नवंबर, 2025 को सुबह लगभग 11:02 बजे एक कॉल के दौरान उनसे कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। खुराना ने 15 अक्टूबर, 2025 को सभी आरोपित पक्षों को विधिक नोटिस भेजा, जो 16 से 18 अक्टूबर के बीच प्राप्त भी हुआ। बावजूद इसके, कथित कॉल और संदेशों का सिलसिला जारी रहा। इस निरंतर दबाव के कारण वह गंभीर मानसिक तनाव और माइग्रेन से पीड़ित हो गए हैं।
प्रार्थी द्वारा थाना सिकंदरा, पुलिस आयुक्त आगरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को डाक के माध्यम से शिकायत भेजी गई, परंतु मुकदमा दर्ज न होने पर उन्होंने अदालत की शरण ली। प्रार्थनापत्र में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत संज्ञेय अपराध का उल्लेख किया गया। अदालत ने थाना सिकंदरा को प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृत्युंजय श्रीवास्तव ने आदेश पारित करते हुए थाना सिकंदरा को निर्देशित किया कि प्रार्थनापत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित की जाए।
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