डी.ई.आई. ने रसायन विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग शुरू किया
आगरा, 13 फरवरी। दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) में रसायन विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) का प्रयोग शुरू किया गया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक विज्ञान की एक प्रभावशाली तकनीक के रूप में उभरकर सामने आई है, जिसने रसायन विज्ञान के अनुसंधान और शिक्षण दोनों को नई दिशा प्रदान की है। AI की सहायता से अणुओं के गुणों की भविष्यवाणी, रासायनिक अभिक्रियाओं का विश्लेषण, औषधि खोज, नवीन सामग्री विकास, तथा प्रयोगशाला प्रक्रियाओं का अनुकूलन अधिक सटीक, तेज़ और किफायती रूप में संभव हो पाया।
मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी AI तकनीकों के माध्यम से जटिल रासायनिक डेटा—जैसे स्पेक्ट्रोस्कोपिक परिणाम और अभिक्रिया मार्ग की व्याख्या सरल हुई है। इससे अनुसंधान में समय और संसाधनों की बचत के साथ-साथ नवाचार की गति भी बढ़ी है। स्वचालित प्रयोगशालाएँ और कंप्यूटर-आधारित मॉडलिंग रसायन विज्ञान में AI के प्रमुख अनुप्रयोगों के रूप में सामने आए हैं।
रसायन विज्ञान में AI की इस क्रांतिकारी भूमिका को वैश्विक मान्यता 2024 में रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार के रूप में मिली। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार डेविड बेकर, डेमिस हैसाबिस और जॉन जम्पर को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। इन वैज्ञानिकों को यह सम्मान प्रोटीन की संरचना की सटीक भविष्यवाणी और नए प्रोटीनों की अभिकल्पना के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया गया। डेमिस हैसाबिस और जॉन जम्पर द्वारा विकसित AI प्रणाली अल्फाफोल्ड (AlphaFold) ने प्रोटीन की जटिल संरचनाओं को बहुत तेज़ और सही ढंग से समझना संभव बना दिया है। यह उपलब्धि औषधि विकास, जैव-रसायन और चिकित्सा अनुसंधान में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है। डेविड बेकर ने कंप्यूटर आधारित तरीकों से ऐसे नए कृत्रिम प्रोटीनों की रचना की, जो प्रकृति में पहले मौजूद नहीं थे। यह कार्य भविष्य में नई दवाओं, एंज़ाइमों और जैव-आधारित सामग्रियों के विकास में सहायक होगा।
डी.ई.आई. का रसायन विज्ञान विभाग छात्रों और शोधार्थियों को सुदृढ़ अकादमिक आधार के साथ अनुसंधान-उन्मुख वातावरण प्रदान कर रहा है।
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