खुलासा: मुंबई के व्यापारी का अपहरण नहीं हुआ, समलैंगिक रिश्तों और पुराने लेन-देन का था विवाद

आगरा, 08 जनवरी। थाना एत्माद्दौला क्षेत्र में रामबाग चौराहे से बुधवार की दोपहर मुंबई के व्यापारी के अपहरण और फिरौती वसूली की सूचना पुलिस जांच में झूठी और मनगढ़ंत निकली। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। 
खबरों के अनुसार, जांच में खुलासा हुआ कि यह कोई अपहरण या लूट नहीं, बल्कि समलैंगिक रिलेशनशिप और पैसों के लेन-देन से जुड़ा पुराना विवाद था। उसी विवाद को छिपाने के लिए व्यापारी ने अपहरण और लूट की झूठी कहानी रची थी। मुंबई के कपड़ा कारोबारी सतीश अग्रवाल ने पुलिस को बताया था कि उन्हें कार सवार बदमाशों ने अगवा कर हाथरस की ओर ले जाकर मारपीट की और ऑनलाइन फिरौती लेने के बाद छोड़ दिया।
मुंबई निवासी सतीश अग्रवाल, जिनकी सुचिता फेब्रीकेट्स नाम से फर्म है, मंगलवार को आगरा आए थे और दरेसी स्थित एक होटल में ठहरे थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि बुधवार की दोपहर करीब दो बजे उन्हें दिल्ली के एक परिचित कारोबारी विकास अग्रवाल का फोन आया, जिसने रामबाग पर मिलने के लिए बुलाया। सतीश ऑटो रिक्शा से रामबाग पहुंचे और एक दुकान के पास खड़े होकर इंतजार करने लगे। इसी दौरान नीले रंग की एक कार आई, जिसमें सवार दो लोगों ने उन्हें जबरन बैठा लिया। कुछ देर बाद उन्हें होश आया तो वह किसी खेत में थे, जहां 7–8 लोग मौजूद थे। आरोपियों ने मारपीट की, पैसे मांगे और परिजनों से फिरौती दिलाने का दबाव बनाया। 
सतीश ने बताया कि एजेंट के जरिए आरोपियों के बताए खाते में एक लाख रुपये और बाद में 20 हजार रुपये और ट्रांसफर कराए गए, तब जाकर उन्हें सादाबाद (हाथरस) के पास छोड़ दिया गया। वह राहगीरों की मदद से बस स्टैंड पहुंचे और 50 रुपये मांगकर दरेसी लौटे, जहां व्यापारियों को घटना बताई। इसके बाद एक व्यापारी नेता के साथ वह थाना एत्माद्दौला पहुंचे।
डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने कई टीमें गठित कीं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रेसिंग के जरिए जब जांच की, तो कारोबारी की कहानी में कई विरोधाभास सामने आए। जांच में खुला ने महज पांच घंटे में पूरे मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी सिटी के मुताबिक 1.20 लाख रुपये, मोबाइल और अंगूठी छीने जाने का दावा फर्जी निकला। कोई जबरन अपहरण नहीं हुआ था। मामला आपसी सहमति से हुए संबंध और धन विवाद का है। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है, वहीं झूठी सूचना देने के पहलू पर भी जांच की जा रही है।
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