राष्ट्रवाद के विविध आयाम: साहित्य और सिनेमा पर ऑथर्स गिल्ड की राष्ट्रीय संगोष्ठी

आगरा, 07 सितंबर। ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के तत्वावधान में सोमवार को आरबीएस कॉलेज के राव कृष्णपाल सिंह ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। विषय था - "राष्ट्रवाद के विविध आयाम: साहित्य और सिनेमा के विशेष संदर्भ में।"
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि साहित्य और सिनेमा देशभक्ति के सशक्त माध्यम हैं, जिनसे वसुधैव कुटुम्बकम की भावना जन्म लेती है। देश का भविष्य लेखकों और फिल्म निर्माताओं की राष्ट्रभक्ति पर निर्भर है।
अध्यक्षता कर रहे एजीआई महासचिव प्रो. एस.एस. अवस्थी ने कहा कि राष्ट्रवाद हमारे स्वाध्याय के कार्यों में निहित है। माध्यम चाहे सिनेमा हो या साहित्य, सोच सकारात्मक और मानव कल्याण के लिए होनी चाहिए।विशिष्ट अतिथि अम्बरीश पाल सिंह ने कहा कि देशभक्ति धार्मिक परंपराओं को परिभाषित करती है, इसलिए देश के प्रति प्रेम की निरंतरता बनाए रखनी होगी। प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि साहित्य और सिनेमा में राष्ट्रवाद को सर्वोपरि रखते हुए लोक मंगल के लिए सांस्कृतिक सरोकार आज की जरूरत है। प्राचार्य प्रो. विजय श्रीवास्तव ने कहा कि कर्तव्य के प्रति निष्ठा भी राष्ट्रवाद का प्रतीक है। हमारी भाषा, कार्यशैली और संगत भी राष्ट्रवाद है।
प्रो. सुनीता रानी घोष, डॉ. मुकेश अग्रवाल और प्रो. राजेश कुमार ने भी राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति और मौलिक लेखन पर अपने विचार रखे।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. ज्योत्सना शर्मा की वाणी वंदना से हुआ। कवि डॉ. यशोयश और डॉ. सौरभ देवा ने अतिथियों का शॉल, माला और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर संगोष्ठी का श्रीगणेश किया गया।
द्वितीय सत्र शोधपत्र संवाद सत्र रहा, जिसमें डॉ. राजेन्द्र मिलन, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. सुषमा सिंह सहित कई शोधार्थियों ने पत्र वाचन किया।
तीनों सत्रों का संचालन क्रमशः डॉ. युवराज सिंह, श्रुति सिन्हा और सुशील सरित ने किया। समापन पर मीडिया प्रभारी डॉ. यशोयश ने आभार जताया।
तृतीय सत्र में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें डॉ. शशि तिवारी, डॉ. शशि गोयल, अशोक गोयल, डॉ. अशोक अश्रु सहित कई कवियों ने काव्य पाठ कर राष्ट्रवाद का संदेश दिया।
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