इंटरनेट और AI कितने भी आगे बढ़ जाएं, पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं
आगरा, 05 सितंबर। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कितनी भी तेजी से विकसित हो जाएं, लेकिन पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं हो सकता। तकनीक पुस्तकों की जगह नहीं लेगी, बल्कि ज्ञान अर्जित करने में सहायक बनेगी। नई पीढ़ी को पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर रोज कम से कम 15 पन्ने अच्छी पुस्तक के जरूर पढ़ने चाहिए।
ये बातें आगरा कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ. पी. बी. झा ने शनिवार को सप्रू हॉस्टल परिसर में दस दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन पर कहीं। यह मेला 14 सितंबर तक चलेगा।
समय इंडिया ट्रस्ट, नई दिल्ली और पुस्तक मेला समिति के तत्वावधान में आयोजित मेले का उद्घाटन डॉ. झा ने किया। इस अवसर पर आगरा कॉलेज के डॉ. वी.के. सिंह, डॉ. ए.के. सिंह, डॉ. बी.के. चिकारा, लेखिका भावना वरदान शर्मा, अनुपमा दीक्षित सहित साहित्य और शिक्षा जगत के लोग मौजूद रहे।
समारोह में प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। साहित्य सरोवर के संचालक कशिश गोयल ने 'बुके नहीं, बुक दीजिए' संदेश के साथ अतिथियों को भारतीय संविधान की प्रति भेंट की। संचालन कवयित्री डॉ. मनीषा गिरि ने किया।
मेले में रविवार 6 सितंबर को शाम 4:30 बजे लोकगीत एवं देशभक्ति गीत गायन प्रतियोगिता और शाम 6 बजे स्थानीय कवि सम्मेलन होगा।

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