फर्जी पंजीकरण से 1.69 करोड़ की जीएसटी हेराफेरी, आगरा में दो पार्टनरों पर एफआईआर दर्ज

आगरा, 27 सितम्बर। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण कराकर सरकार को 1.69 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की शिकायत पर लोहामंडी थाने में एमएस कैलाशपति एंटरप्राइजेज के दो पार्टनरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य कर उपायुक्त खंड-14 राहुल कुमार द्विवेदी की तहरीर पर फर्म के पार्टनर सुमित सिंह निवासी विवेकानंद पुरम, शास्त्रीपुरम और विपिन सिंह निवासी गणपति स्मार्ट सिटी, सिकंदरा के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। फर्म का पंजीकृत पता फर्स्ट फ्लोर, फ्लैट एफ-103, कोमल अपार्टमेंट, लोहिया नगर, बल्केश्वर है।
विभाग के मुताबिक आरोपियों ने टेक्सटाइल फैब्रिक, बटन और प्रेस-फास्टनर्स के कारोबार के नाम पर एक सितंबर, 2022 को जीएसटी का पंजीकरण कराया था। शिकायत मिलने पर आठ फरवरी, 2023 को विभागीय टीम ने मौके पर जांच की तो फर्म अस्तित्वहीन मिली। इसके बाद प्राधिकरण ने 13 सितंबर, 2022 से ही उसका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया।
 
जांच में सामने आया कि सितंबर, 2022 से जनवरी, 2023 के बीच फर्म ने बिना वास्तविक खरीद के कागजों में खरीद दिखाकर 1.69 करोड़ रुपये से अधिक की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल की और उसे दूसरी फर्मों को पास कर दिया। इसमें 84.92 लाख रुपये की केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी शामिल है।
आईटीसी के लिए जिन फर्मों से खरीद दिखाई गई, उनमें मीनल ट्रेडिंग कंपनी, बुधप्रीत कॉटन एलएलपी और पाखी निट फैब शामिल हैं। विभाग के अनुसार मीनल ट्रेडिंग का जीएसटी पंजीकरण भी फर्जी निकला, जबकि अन्य दो फर्मों के पंजीकरण बाद में निरस्त कर दिए गए।
एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने मीडिया को बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। फर्जी दस्तावेजों, रजिस्ट्रेशन और आईटीसी ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
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