"गाली देते जेन-जी नहीं, संस्कारवान भारतीय चरित्र चाहिए"- गोष्ठी में वक्ता हुए मुखर, पुस्तक का भी विमोचन

आगरा, 13 अगस्त। नारी सृजक है, बहुत कुछ कर सकती है, परिवार को नारी की पहले जरूरत है, उसको प्राथमिकता दें। बच्चे की पहली शिक्षक मां होती है, बच्चे को बेहतरीन नागरिक बनाएं, तभी देश-समाज का भला होगा। जंतर मंतर वाले गाली देते जेन-जी नहीं चाहिए, उन पर हम शर्मिंदा हैं, हमें संस्कारवान भारतीय चरित्र चाहिए। महिला सशक्तिकरण के नाम पर खानापूरी हो रही है। 
यह विचार आगरा पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक डॉ.महेश शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेन ज़ी और नारी सशक्तिकरण विषय पर सेठ पदम चंद जैन संस्थान में आयोजित गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन में व्यक्त किए। कार्यक्रम में आगरा कॉलेज की पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष कवयित्री डॉ.शशि तिवारी की मां कुंती तिवारी पर पुस्तक "मां जैसा कोई नहीं जीया: एक युग" का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. गिरधर शर्मा ने कहाकि नारी भारत में सशक्त रही है, देवी का स्वरूप रही है। युग बदला है तो मान्यताएं भी बदली हैं, आज के युग के अनुरूप नारी को सशक्तिकरण की चुनौतियां स्वीकार करनी होगी।
मुख्य वक्ता प्रो.कमलेश नागर ने जेन जी का जिक्र करते कहा दिल्ली के जंतर-मंतर पर गलियाँ देती किशोरियों-युवतियों को हम नारी सशक्तिकरण नहीं कह सकते। सड़क पर उच्छृंखल व्यवहार करना नारी सशक्तिकरण नहीं है। 
साहित्यकार डॉ. कुसुम चतुर्वेदी ने कहाकि जंतर-मंतर देखकर लगा, आंदोलन सलीके से नहीं हुआ। इसके लिए आभासी दुनिया जिम्मेदार है। जीया का जिक्र करते उन्होंने कहा, "कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं जिनको यादों में ठहर जाने का हुनर आता है।"  डॉ. ज्योत्सना रघुवंशी ने कहा कि नई तकनीक से कदमताल नहीं करेंगे तो पिछड़ जाएंगे। सोशल मीडिया की ताकत स्वीकारनी ही होगा, लेकिन दुष्प्रभावों से बचें।
डॉ. शशि तिवारी ने कहा कि यह पुस्तक मेरी वैयक्तिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह पुस्तक दुनियाभर की माताओं को समर्पित है। उनकी पुत्री शिवरंजनी तिवारी ने कविता सुनाई- "तुम ही घर की धड़कन थीं, तुम ही परिवार का मान....।"
विशिष्ट अतिथि प्रो. ब्रजेश रावत थे। वक्ताओं में वरिष्ठ साहित्यकार राज बहादुर राज, कर्नल राजीव तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार संजय तिवारी, पं. योगेश शर्मा योगी, डॉ. महेश धाकड़ शामिल थे। संचालन दिलीप रघुवंशी ने किया। इस दौरान दो लघु फिल्में भी दिखाईं गईं। जिनका लेखन, निर्देशन और निर्माण शिवरंजनी तिवारी और मेजर शेखर द्वारा किया गया। कार्यक्रम में ब्रिगेडियर सौरभ तिवारी, सुधांशु पांडेय, रजनी पांडेय, रश्मि शांडिल्य, शिप्रा तिवारी, रूपम, भावना, डॉ. विशाल, ममता, कुमकुम रघुवंशी, संजय शर्मा, विनोद दीक्षित, डॉ. नीलम भटनागर, अनिल जैन, संजय गुप्त, शरद गुप्त, राजकुमार दीक्षित, जितेंद्र दीक्षित, राजेंद्र शर्मा, डॉ. रुचिरा प्रसाद, स्वाति माथुर, श्वेता, आचार्य उमाशंकर, अनिल अरोड़ा संघर्ष आदि मौजूद रहे।
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