अस्पताल प्रशासन का दावा- बच्चे की मौत गम्भीर बीमारी से हुई, परिजनों ने नहीं कराया पोस्टमार्टम, सत्रह घंटे पहले उसपर गिरा था छत का प्लास्टर
आगरा, 22 अगस्त। एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में भर्ती दस वर्षीय बालक उमैर की शनिवार की सुबह मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चे की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी और उसकी मौत गंभीर निमोनिया तथा पुरानी बीमारी के कारण हुई।
बता दें कि एक दिन पहले ही बच्चा वार्ड की छत का प्लास्टर गिरने से यह बालक घायल हो गया था। उसे हादसे के बाद इमरजेंसी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार की दोपहर जिस समय छत का करीब एक फीट चौड़ा और मोटा प्लास्टर टूटकर उसके ऊपर गिरा, उस समय उमैर बच्चा वार्ड में भर्ती था। हादसे के अगले ही दिन उसकी मौत होने से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं।
परिजनों के मुताबिक, हादसे से करीब चार घंटे पहले ही उमैर को उस बेड पर शिफ्ट किया गया था, जहां छत का प्लास्टर गिरा। उसकी मां भी पास ही लेटी थीं। उमैर प्लास्टर की चपेट में आ गया। परिजनों के मुताबिक, बच्चे को खरोंच आई, लेकिन उस समय कोई गंभीर बाहरी चोट नजर नहीं आई। मां ने बताया कि प्लास्टर काफी मोटा था और सीधे बच्चे के ऊपर गिरा था। हालांकि उस समय बच्चे को बड़ी चोट नहीं लगी। हादसे के बाद अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल स्थिति संभाली।
अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बच्चा वार्ड में भर्ती सभी 15 बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया था। उमैर की भी सीटी स्कैन समेत कई जांच कराई गईं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, जांच में बच्चे के शरीर में किसी तरह की अंदरूनी चोट नहीं मिली। डॉक्टरों ने भी प्लास्टर गिरने की घटना से बच्चे को गंभीर नुकसान होने की बात नहीं कही थी। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम भी शुरू कराया गया। प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा गया कि हादसे के तत्काल बाद किसी की जनहानि नहीं हुई थी।
हादसे के बाद उमैर का इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा था। आज शनिवार की सुबह करीब छह बजे उसकी मौत हो गई। हादसे और मौत के बीच करीब एक दिन का अंतर होने के कारण परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच घटना को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के मुताबिक, उमैर की हालत पहले से ही गंभीर थी। उन्हें बताया गया कि बच्चे को करीब पांच महीने की उम्र से दौरे पड़ते थे और वह वेस्ट सिंड्रोम से पीड़ित था। इसके अलावा उसे गंभीर निमोनिया था, जिसके इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्राचार्य के अनुसार, प्लास्टर गिरने से बच्चे को केवल मामूली खरोंच आई थी और जांच में कोई अंदरूनी चोट नहीं मिली थी। उनका कहना है कि बच्चे की मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई और प्लास्टर गिरने की घटना महज संयोग थी।
प्राचार्य ने कहा, गम्भीर निमोनिया और दौरे के कारण आवश्यक उपचार के बावजूद भी उसकी स्थिति शनैः शनैः गम्भीर होती गयी, चिकित्सकों के अथक प्रयासों के उपरान्त 22 अगस्त को प्रातः 06 बजे बच्चे की मृत्यु हो गयी। बच्चे की मृत्यु का मुख्य कारण उसकी लम्बे समय से चली आ रही बीमारी एवं गम्भीर निमोनिया था। मेडिकल कालेज प्रशासन द्वारा बच्चे के परिजनों से पोस्टमार्टम कराने हेतु आग्रह किया गया, परन्तु परिजनों द्वारा लिखित में मना कर दिया गया।
उमैर का परिवार उसे गंभीर बीमारी के बीच बेहतर इलाज और जिंदगी की उम्मीद लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज आया था। शुक्रवार को वार्ड की छत का प्लास्टर उसके ऊपर गिरा और अगले ही दिन उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन हादसे को उसकी मौत की वजह नहीं मान रहा है और गंभीर बीमारी को कारण बता रहा है। हालांकि, इस घटना ने पुराने अस्पताल भवनों की सुरक्षा, नियमित निरीक्षण और मरीजों के लिए सुरक्षित इलाज के माहौल को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत इस बात की है कि अस्पताल की जर्जर हो चुकी संरचनाओं की व्यापक जांच कराकर ऐसे हिस्सों की पहचान की जाए, जहां भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
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