नेशनल चैंबर में संविधान संशोधन पर अहम बैठक आज, दिख रही मतभिन्नता, सामने आ सकते हैं गतिरोध
आगरा, 21 अगस्त। नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स की प्रबंध कार्यकारिणी की बैठक आज शुक्रवार को शाम साढ़े चार बजे से बाईपास मार्ग स्थित एक होटल में प्रस्तावित है। बैठक में अन्य मुद्दों के साथ संविधान संशोधनों पर भी विचार किया जाना है। कुछ सदस्यों में इन संशोधनों को लेकर मतभिन्नता है। माना जा रहा कि बैठक में मतभेद सामने आ सकते हैं।
सूत्रों का दावा है कि कुछ सदस्यों में संविधान संशोधन समिति को लेकर नाराजगी भी है। उन्होंने बैठक से दूर रहकर अपनी नाराजगी जताने का निर्णय लिया है। कुछ सदस्यों ने बैठक को होटल रखे जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विशिष्ट अतिथियों के आने पर होटलों में संगोष्ठी की परंपरा रही है। चैंबर भवन का नवीनीकरण हो जाने के बाद अधिकांश बैठकें वहीं होती रही हैं।
चैंबर के पिछले चुनावों के बाद से ही संविधान में संशोधन की मांग उठने लगी थी। पिछली संविधान संशोधन समिति के प्रमुख सदस्यों ने भी इसकी जरूरत बताई थी। इसी मांग को देखते हुए नई संविधान संशोधन समिति का गठन किया गया। समिति से तीस मई तक सुझाव देने को कहा गया था, लेकिन समिति को इसमें समय लग गया। अब प्रमुख बिंदुओं पर संविधान संशोधन रखे गए हैं।
दावा किया जा रहा है कि संविधान संशोधन समिति के सदस्यों को प्रस्तावित संशोधन भेजे गए हैं। लेकिन कुछेक सदस्यों ने ऐसे किसी संशोधन प्रस्तावों की जानकारी होने से इनकार किया। कहा तो यह तक जा रहा है कि समिति में प्रमुख भूमिका में रखे गए सदस्यों को भी इसकी प्रति नहीं मिली है। यह इन सदस्यों की नाराजगी का प्रमुख कारण हो सकता है।
यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि कहीं संविधान संशोधन समिति अपने उद्देश्यों से भटक तो नहीं गई। सूत्रों का कहना है कि चैंबर की गरिमा बनाए रखने और नए सदस्यों बनाने में नियम कड़े करने के लिए ही संशोधन समिति बनाई गई थी। लेकिन नए सदस्यों के लिए सदस्यता शुल्क में बढ़ोतरी और एक साल की वेटिंग के अलावा कोई अन्य नया नियम नजर नहीं आ रहा है। अभी तक नए सदस्यों को दस हजार रुपये और जीएसटी देनी होती थी, इसे 25 हजार रुपये और जीएसटी करने का प्रस्ताव है।
वार्षिक सदस्य शुल्क 2250+ जीएसटी से बढ़ाकर 2542+जीएसटी और सम्बद्ध सदस्य शुल्क 3500+जीएसटी से बढ़ाकर 5000+जीएसटी करने का प्रस्ताव है। कार्यकारिणी प्रत्याशी के लिए पांच वर्ष की सदस्यता का प्रस्ताव है।
कोर कमेटी के नाम पर अंकुश का विरोध
समिति के एक प्रमुख संशोधन प्रस्ताव पर भी वरिष्ठ सदस्यों को आपत्ति है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि कोई पूर्व या वर्तमान अध्यक्ष पुनः अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहेंगे तो उन्हें कोर कमेटी की सहमति लेनी होगी। आपत्तिकर्ताओं का तर्क है कि यदि चैंबर के बहुसंख्य मतदाता उन्हें पुनः प्रत्याशी बनाना चाहें तो इसमें कोर कमेटी की सहमति की जरूरत क्यों?
उपाध्यक्षों और कोषाध्यक्ष पर भी बंदिशें बढ़ाने की योजना
अन्य प्रस्तावों में उपाध्यक्षों और कोषाध्यक्ष पद पर भी बंदिशें बढ़ाने की योजना है। उपाध्यक्ष के लिए चार वर्ष और कोषाध्यक्ष के लिए तीन वर्ष कार्यकारिणी सदस्य होना प्रस्तावित है। वर्ष 2017 तक के पूर्व उपाध्यक्षों को मिली ही एक ही साल बाद अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की छूट को 31 मार्च 2030 तक की सीमा में बांधने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार कार्यकारिणी प्रत्याशी के लिए न्यूनतम पांच वर्ष सदस्यता का प्रस्ताव है। इसके अलावा नए सदस्यों को एक साल बाद ही मतदान का अधिकार देने और सभी मतदाताओं के लिए फोटोयुक्त मतदाता परिचय पत्र जारी करने का भी प्रस्ताव है। चुनाव में व्यवधान पर चुनाव समिति को कार्रवाई का अधिकार देने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा चैंबर के प्रकोष्ठों की संख्या घटाकर 25 करने और छह महीने तक बैठक न करने वाले प्रकोष्ठ अध्यक्ष का पद स्वत: रिक्त हो जाने का प्रस्ताव है। लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी हर वर्ष एक पूर्व अध्यक्ष को दिए जाने का प्रस्ताव है।
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