बीमा कंपनी ने चोरी गई कार का बीमा भुगतान देने से कर दिया था इंकार, उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित को दिलाये 7.92 लाख रुपये

आगरा, 19 अगस्त। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम) के अध्यक्ष सर्वेश कुमार एवं सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने कार चोरी के दावे को गलत तरीके से खारिज करने को बीमा कंपनी की सेवा में घोर कमी करार दिया है। आयोग के निर्णय के अनुपालन में बीमा कंपनी द्वारा जमा कराई गई 7,92,325 रुपये की धनराशि का चेक परिवादी को प्रदान कर दिया गया।
बताया गया है कि दयालबाग निवासी संजीव कुमार उपाध्याय की विटारा ब्रीजा कार 21 फरवरी, 2022 की रात गोयल सिटी अस्पताल, ट्रांस यमुना, रामबाग के बाहर सर्विस रोड से चोरी हो गई थी। घटना की प्राथमिकी थाना एत्माद्दौला में दर्ज कराई गई और बीमा कंपनी न्यू इण्डिया एश्योरेंस को तत्काल सूचना दी गई। पुलिस विवेचना के उपरांत न्यायालय द्वारा अंतिम आख्या स्वीकार कर ली गई।
इसके बावजूद बीमा कंपनी के सर्वेयर ने वाहन के भीतर दूसरी क्षतिग्रस्त चाबी रखे होने को आधार बनाकर लापरवाही का आरोप लगाया और दावा निरस्त कर दिया।
परिवादी के अनुसार सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट था कि चोरों ने करीब 45 मिनट तक मशक्कत करके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से लॉक डिकोड किया व स्टीयरिंग लॉक तोड़ा, जिसमें वाहन स्वामी की कोई लापरवाही नहीं थी। परिवादी ने अधिवक्ता आनंद स्वरूप शर्मा के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में परिवाद संख्या 103/2024 दायर किया।
आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनते हुए माना कि पुलिस विवेचना व न्यायालयी आदेश से पूर्व ही सर्वेयर की भ्रामक आख्या के आधार पर क्लेम खारिज करना सेवा में कमी है।
आयोग ने परिवादी के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए बीमा राशि (आईडीवी से 10 प्रतिशत कटौती उपरांत) 6,85,180/- रुपये मय छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति मद में 10,000 रुपये एवं वाद व्यय के 5,000 रुपये अदा करने का आदेश दिया था।
आदेश के अनुपालन में विपक्षी न्यू इण्डिया एश्योरेंस कंपनी द्वारा डिक्री की संपूर्ण धनराशि 7,92,325 रुपये आयोग के खाते में जमा कराई गई, जिसे 14 अगस्त, 2026 को आयोग के आदेशानुसार परिवादी संजीव कुमार उपाध्याय को अकाउंट पेई चेक के माध्यम से सौंप दिया गया।
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