मॉक ड्रिल: ताजमहल में लावारिस बैग मिलते ही सक्रिय हो गईं सुरक्षा एजेंसियां
आगरा, 31 जुलाई। ताजमहल के पश्चिमी गेट पर शुक्रवार को बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। अभ्यास के दौरान लावारिस बैग में विस्फोटक सामग्री होने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया, समन्वय और मानक संचालन प्रक्रिया के पालन का परीक्षण किया गया।
मॉक ड्रिल सुबह 10:40 बजे से 11:50 बजे तक हुई। शुरुआत में पश्चिमी गेट के प्री-सिक्योरिटी क्षेत्र में एक संदिग्ध लावारिस बैग दिखाई देने की सूचना कंट्रोल रूम को दी गई। सूचना मिलते ही सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय हो गई और सभी संबंधित एजेंसियों तथा ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को तत्काल अलर्ट जारी किया गया। सबसे पहले पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्र को खाली कराया गया तथा आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई। इसके साथ ही किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने अपने-अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वहन शुरू कर दिया।
घटनास्थल पर पहुंची सीआईएसएफ की बम निरोधक एवं निस्तारण टीम तथा डॉग स्क्वायड ने संदिग्ध बैग की गहन जांच की। जांच के दौरान बैग में विस्फोटक सामग्री होने की परिकल्पना के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। सभी गतिविधियां नियंत्रित वातावरण में संपन्न हुईं।
मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ, उत्तर प्रदेश पुलिस, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, अग्निशमन सेवा, सीआईएसएफ एवं यूपी पुलिस के बीडीडीएस, डॉग स्क्वायड, एसआईएस, एलआईयू तथा मेडिकल टीम सहित कई एजेंसियों ने भागीदारी निभाई।
पूरी मॉक ड्रिल का संचालन सीआईएसएफ यूनिट ताजमहल के कमांडेंट ऋषि कौशिक के निर्देशन में किया गया। अभ्यास समाप्त होने के बाद सभी संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के साथ डी-ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें ड्रिल के दौरान अपनाई गई रणनीति, प्रतिक्रिया, समन्वय, चुनौतियों और भविष्य में सुधार के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस प्रकार के नियमित मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी संभावित आपात स्थिति में सुरक्षा बलों की तैयारियों को परखना, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना तथा ताजमहल जैसे संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय महत्व के पर्यटन स्थल की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाना होता है।
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