मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आगरा में घोषणा- कॉलेज शिक्षकों को पांच लाख तक कैशलैस इलाज, तीन करोड़ तक बीमा का सुरक्षा कवच

आगरा, 26 जुलाई। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आगरा दौरे के दूसरे दिन रविवार को उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलैस योजना' का शुभारंभ किया। योजना में प्रदेश के विश्वविद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त एवं निजी महाविद्यालयों के करीब 1.28 लाख शिक्षकों एवं कर्मचारियों तथा उनके परिवारों सहित लगभग दस लाख लोगों को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। 
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित शिवाजी मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शोध, नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मुख्यमंत्री ने अवलोकन भी किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति वर्ष 05 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलेगा। कार्ड बनने के साथ ही उसी दिन से योजना का लाभ शुरू हो जाएगा। योजना के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने का पूरा खर्च, ऑपरेशन और इलाज, दवाइयां, जांच और डिस्चार्ज तक की सभी चिकित्सा सेवाएं सरकार की ओर से वहन की जाएंगी। इस योजना का संचालन साचीज (SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा तथा उपचार की दरें आयुष्मान भारत योजना के अनुरूप रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में 1900 से अधिक उपचार पैकेज उपलब्ध रहेंगे। इनमें प्रमुख रूप से कैंसर, हृदय रोग, किडनी संबंधी गंभीर बीमारियां, न्यूरो सर्जरी, बड़ी एवं जटिल सर्जरी तथा अन्य गंभीर रोग का उपचार कैशलेस सुविधा के तहत किया जा सकेगा।
कार्यक्रम में पंजाब नेशनल बैंक के साथ हुए एमओयू का भी उल्लेख किया गया। इस समझौते के तहत शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। इसके तहत 1.50 करोड़ रुपये तक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 3 करोड़ रुपये तक हवाई दुर्घटना बीमा, अस्पताल में भर्ती होने पर 60 हजार रुपये तक कैश बेनिफिट तथा 12 लाख रुपये तक टर्म लाइफ इंश्योरेंस का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने भारतीय शिक्षा परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध, सोशल मीडिया के प्रभाव और शिक्षकों की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में शिक्षक का स्थान सर्वोच्च रहा है। जब दुनिया का बड़ा हिस्सा अज्ञान के अंधकार में था, तब भारत तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों का निर्माण कर चुका था। तक्षशिला, जो आज पाकिस्तान में है, अविभाजित भारत का हिस्सा था और उसका नाम भगवान राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर पड़ा था।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि "कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होता जिसमें योग्यता न हो। आवश्यकता केवल उस योग्यता को पहचानने और उसे निखारने वाले शिक्षक की होती है।" उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पढ़ाना नहीं बल्कि विद्यार्थियों से निरंतर संवाद करना, उनकी समस्याओं को सुनना और सही दिशा देना भी है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से विशेष अपील करते हुए कहा कि "सोशल मीडिया आज की आवश्यकता है। इससे दूर नहीं रहा जा सकता, लेकिन इसका उपयोग समाज और राष्ट्रहित में होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि छात्र फर्जी अकाउंट की पहचान करना सीखें। गलत और सही सूचना में अंतर समझें। अफवाहों से बचें। किसी भी जानकारी पर आंख बंद करके विश्वास न करें। 
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, प्रदेश के मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, भूपेंद्र चौधरी, सांसद राजकुमार चाहर, कुलपति आशु रानी, महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह, डॉ. जीएस धर्मेश, पुरुषोतम खण्डेलवाल, बाबूलाल, भगवान सिंह कुशवाहा, पक्षालिका सिंह, छोटेलाल वर्मा, आदि भी उपस्थित रहे।
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