पड़ताल: अग्निशमन विभाग में छह वर्षों से न पदोन्नति, न सीधी भर्ती, 36% से 91% तक पद खाली, मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद डीजी फायर सर्विसेज के पत्र ठंडे बस्ते में, कैसे हों सरकारी अपेक्षाएं पूरी
लखनऊ/आगरा, 12 जुलाई। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही नए अग्निशमन केंद्रों को क्रियाशील करने के निर्देश दे चुके हों, लेकिन प्रदेश के वरिष्ठ नौकरशाह उनके निर्देशों को अमली जामा पहनाने के प्रति उदासीन नजर आ रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से नौकरशाही के रवैये के खिलाफ जनप्रतिनिधियों की आवाज उठती रही है। लेकिन अब तो महानिदेशक स्तर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की अनसुनी की जा रही है।
ऐसे ही एक मामले में प्रदेश के निवर्तमान महानिदेशक अग्निशमन तथा आपात सेवा सुजीत पांडेय द्वारा प्रदेश के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को लिख कर मुख्यमंत्री के निर्देशों को याद दिलाया गया। गम्भीर बात यह है कि विगत दो अप्रैल को पत्र भेजने के बाद गत 26 जून को फिर याद दिलाया गया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग के राजपत्रित/अराजपत्रित (लिपिक, लेखा व गोपनीय सहायक सहित) संगत पदों की सेवा नियमावलियों के प्रख्यापन करा दिया जाए, लेकिन उनके स्मृति पत्र भेजने को भी पंद्रह दिन से अधिक गुजर चुके हैं और अभी तक इस बारे किसी निर्णय की जानकारी नहीं है।
36% से 91% तक खाली पड़े हैं पद,
चार वर्षों से न पदोन्नति न सीधी भर्ती
निवर्तमान डीजी (फायर सर्विसेज) सुजीत पांडेय ने अपर मुख्य सचिव गृह को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा कि अराजपत्रित कर्मचारियों में से फायरमैन की रिक्ति 36%, लीडिंग फायरमैन की रिक्ति 63%, फायर सर्विस चालक की रिक्ति 42%, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी की रिक्ति 68% तथा अग्निशमन अधिकारी की रिक्ति 91% है। सेवा नियमावली के अभाव में विगत चार वर्षों से कोई भी प्रोन्नति अथवा सीधी भर्ती भी नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि विभागीय पदोन्नति तो वर्ष 2020 से रुकी हुई हैं।
गिर रहा मनोबल, प्रभावित
हो रही त्वरित कार्रवाई
पत्र में लिखा गया कि अग्निशमन सेवा एक अनिवार्य एवं संवेदनशील आपातकालीन सेवा है। विभाग में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर उल्लेखनीय संख्या में रिक्तियां विद्यमान होने के फलस्वरूप उपलब्ध कार्मिकों पर अत्यधिक कार्यभार है तथा विभागीय कार्यों के निष्पादन में व्यावहारिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं। सेवा नियमावली के अभाव में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रारम्भ नहीं हो पा रही है। कार्मिकों की पदोन्नति न होने से उनका मनोबल भी प्रभावित हो रहा है। फायर स्टेशनों पर उपलब्ध मानव संसाधन निर्धारित मानकों से कम हैं। आपदा एवं अग्निकाण्ड की घटनाओं पर त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमता प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है। बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विकास एवं बहुमंजिला भवनों की संख्या में निरन्तर वृद्धि के सापेक्ष विभागीय संसाधनों का सुदृढ़ीकरण बाधित हो रहा है। वर्तमान कार्मिकों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ने से प्रशासनिक एवं परिचालन संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही है।
शासन ने दस मार्च को मांगा
था प्रख्यापन प्रस्ताव
डीजी फायर ने पत्र में शासन के पत्र संख्या: 325/छः-पु0-8-2026-1746120 दिनांकः 10 मार्च 2026 का संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि शासन द्वारा उप्र अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग के राजपत्रित आराजपत्रित (लिपिक, लेखा व गोपनीय सहायक सहित) संगत पदों की सेवा नियमावलियों के प्रख्यापन सम्बन्धी प्रस्ताव/प्रारूप शीघ्र शासन को उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है।
स्वीकृत पद दस हजार, पर
6600 ही कर्मी उपलब्ध
कहा गया कि सेवा नियमावली का प्रख्यापन न होने के कारण अराजपत्रित स्तर के स्वीकृत लगभग 10 हजार से अधिक अधिकारी/कर्मचारी के सापेक्ष 6600 अधिकारी कर्मचारी ही उपलब्ध हैं। उप्र अग्निशमन तथा आपात सेवा अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारी सेवा नियमावली प्रख्यापन न होने के कारण प्रोन्नति/भर्ती सम्भव नहीं हो पा रही है। विभिन्न पदों की बड़ी संख्या में रिक्ति के कारण मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में नये अग्निशमन केन्द्रों को क्रियाशील करने में भी समस्या उत्पन्न हो रही है। सेवा नियमावलियों एवं दण्ड नियमावली का प्रारूप भी तैयार किया जा चुका है, जिसका प्रख्यापन न होने से सभी मामले अटके पड़े हैं।
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