पंकज के वेणु वादन और उत्सव गोपाल के गायन से संपन्न हुई नाद की साधना
आगरा, 01 जून। पं. रघुनाथ तलेगांवकर फाउण्डेशन ट्रस्ट और संगीत कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में नाद साधना प्रातःकालीन संगीत सभा के 34वें वार्षिक समारोह का आयोजन ग्रांड होटल के मुख्य सभागार में किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ प्रथम पूज्य श्री गणपति, वाग्देवी मां सरस्वती, ब्रजरत्न पं. रघुनाथ तलेगांवकर, मां सुलभा तलेगांवकर एवं संगीत नक्षत्र पं. केशव तलेगांवकर के छायाचित्रों पर माल्यार्पण एवं प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन कर अरुण डंग, डॉ अनिल गौतम, पं. मोहित कुमार, डॉ अरुण चतुर्वेदी, ट्रस्ट अध्यक्ष श्री विजयपाल सिंह चौहान, उपाध्यक्ष श्री अनिल वर्मा, सहसचिव डॉ मंगला मठकर ने किया।
सांगीतिक कार्यक्रम में सर्वप्रथम पं केशव तलेगांवकर द्वारा ध्रुपद अंग में रचित राग अहीर भैरव में निबद्ध नाद वन्दना का प्रस्तुतिकरण केन्द्र के संगीत साधकों द्वारा किया गया। तदोपरांत पं. रघुनाथ तलेगांवकर द्वारा रचित आसावरी थाट के कुछ अप्रचलित रागों जिनमें राग देव गंधार, राग खट, राग गांधारी, राग गोपी बसंत एवं राग जौनपुरी की विभिन्न बंदिशों को केन्द्र की स्वर साधिकाओं आर्ची, ईशा सेठ, अभिलाषा शुक्ला, महक जादौन, दृष्टि उपाध्याय, आयाईना दुआ एवं रिदम चतुर्वेदी ने गुरु मां प्रतिभा तलेगांवकर के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत किया। तबले पर डॉ लोकेन्द्र तलेगांवकर एवं संवादिनी पर डॉ गिरिन्द्र तलेगाँवकर ने संगति की।
कार्यक्रम के अगले चरण में सागर से आए एवं निनाद संगीत प्रतियोगिता 2025 के विजय प्रतिभागी श्री पंकज खरारे ने बांसुरी वादन प्रस्तुत किया। आपने राग सुमधुर राग यमन में विलंबित गत ताल एकताल में द्रुत गत तीनताल में श्वांस के विशेष नियंत्रण के साथ एवं पूर्ण स्वर भाव एवं लयात्मक प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ हरिओम माहौर ने उत्कृष्ट संगत की।
कार्यक्रम का समापन सागर से आए युवा कलाकार उत्सव गोपाल श्रीवास्तव के शास्त्रीय गायन से हुआ आपने प्रातः कालीन राग नट भैरव की अवतारणा की।
उन्होंने पं सी. आर. व्यास जी द्वारा रचित ताल एकताल में निबद्ध विलंबित बंदिश “गूंज रही संगीत जग में “ एवं मध्यलय तीनताल में “सूरज चंदा जब तक फिरें” बंदिश तदोपरांत प्रचलित भजन “बाजे मुरलिया बाजे” एवं भैरवी में शिव स्तुति प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नाद ब्रह्म से अनंत ब्रह्मांड की यात्रा करवाई। राग में स्वरों का ठहराव, तानों की विशेष तैयारी उत्सव गोपाल के गायन में सुनने को मिली।
संवादिनी पर डा. गिरींद्र तलेगांवकर एवं डा. लोकेन्द्र तलेगांवकर ने तबला संगत की । उत्सव गोपाल श्रीवास्तव को “नाद गौरव” एवं पंकज खरारे को “नाद साधक” का सम्मान संस्था के पदाधिकारियों ने प्रदान किया गया। डॉ हरिओम माहौर को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।
अंत में अध्यक्ष श्री विजयपाल सिंह चौहान और न्यासी प्रतिभा तलेगांवकर ने आभार व्यक्त किया। श्रोताओं में नीरज जैन, अनिल डंग, सुधीर नारायण, दीपक प्रह्लाद, शेख़ इब्राहिम, संतोष कुलश्रेष्ठ, गजेन्द्र सिंह, अशोक करमरकर, डॉ महेश धाकड़, डॉ चन्द्रमोहन श्रीवास्तव डॉ प्रदीप श्रीवास्तव, डॉ विकास हासवानी, संदीप अरोड़ा, पार्थो सेन, निर्दोष शर्मा, मृदुल कुलश्रेष्ठ, घनश्याम दास रोहरा, राजेश वैद, योगेश भारद्वाज, डॉ मनीषा, शशि गौतम, किरन शर्मा, डॉ अमिता त्रिपाठी, ज्योति अग्रवाल मीनू सेन, नंदिनी सागर, किरन श्रीवास्तव, कल्पना श्रीवास्तव, रजनी रोहरा, दीप्ति कुलश्रेष्ठ, डॉ वन्दना वरुण, कविता शर्मा उपस्थित रहे।
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