उपभोक्ता आयोग प्रथम ने महिंद्रा एंड महिंद्रा और आत्माराम ऑटो एंटरप्राइजेज पर लगाया जुर्माना

आगरा, 22 जून। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम) ने महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी और उसके स्थानीय डीलर के खिलाफ उपभोक्ता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हर्जाना देने का आदेश दिया। आयोग ने वारंटी अवधि के दौरान कार के इंजन की मरम्मत के लिए शुल्क वसूलने को सेवा में कमी माना है।
शाहगंज निवासी परिवादी गोपाल सोलंकी ने 12 जून, 2023 को यह परिवाद दायर किया था। उन्होंने 20 अप्रैल, 2019 को आगरा स्थित आत्माराम ऑटो एंटरप्राइजेज शोरूम से 13,92,562/- रुपये में एक महिंद्रा एक्सयूवी 300 कार खरीदी थी। निर्माता कंपनी द्वारा इस कार के इंजन पर पांच वर्ष की वारंटी प्रदान की गई थी। परिवादी के अनुसार, कार स्टार्ट न होने और इंजन में बार-बार खराबी आने की समस्या उत्पन्न हुई, जिसके चलते उन्हें 2023 में विभिन्न तिथियों पर सर्विस सेंटर में मरम्मत के लिए कुल 33,299 रुपये का भुगतान करना पड़ा। कंपनी द्वारा समस्या का संतोषजनक समाधान न करने पर परिवादी ने आयोग का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने पत्रावली और साक्ष्यों का अवलोकन कर स्पष्ट किया कि किसी विशेषज्ञ रिपोर्ट के अभाव में यह नहीं माना जा सकता कि वाहन में शुरुआत से ही कोई निर्माण दोष (मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट) था, क्योंकि कार लगभग तीन साल ग्यारह महीने तक 91,154 किलोमीटर चल चुकी थी। हालांकि, पीठ ने यह भी पाया कि कंपनी ने कार के इंजन पर 20 अप्रैल 2024 तक की वारंटी दी थी। वारंटी शर्तों के अनुसार, इंजन में खराबी आने पर पार्ट्स और लेबर दोनों निःशुल्क होते हैं। ऐसे में वर्कशॉप द्वारा वारंटी अवधि में परिवादी से 33,299 रुपये वसूलना वारंटी शर्तों का सीधा उल्लंघन और सेवा में कमी है।
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अपने निर्णय में उपभोक्ता आयोग ने महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी लिमिटेड और डीलर (आत्माराम ऑटो एंटरप्राइजेज) को संयुक्त और पृथक रूप से आदेश दिए कि प्रतिपक्षीगण मरम्मत के एवज में वसूले गए 33,299 रुपये परिवादी को वापस करें। इस धनराशि पर परिवाद दायर करने की तिथि से भुगतान की वास्तविक तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा। परिवादी को हुई मानसिक पीड़ा के लिए 20,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान किया जाए। यह सम्पूर्ण धनराशि निर्णय की तिथि से 45 दिन के भीतर आयोग के खाते में डिमांड ड्राफ्ट (डी.डी.) के माध्यम से जमा करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो छह प्रतिशत के स्थान पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।
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