फ्लैट का कब्जा न देने पर बिल्डर के खिलाफ आदेश, जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम ने परिवादी को सौंपा तीन लाख का चेक

आगरा, 13 जून। जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम ने फ्लैट बुकिंग के मामले में सेवा में कमी पाए जाने पर बिल्डर की ओर से तीन लाख रुपये की धनराशि का चेक परिवादी पंकज कुमार गुप्ता को सौंपा। इससे पहले आयोग ने परिवादी के पक्ष में फैसला देते हुए इस राशि का तत्काल भुगतान करने का आदेश दिया था। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने परिवादी को चेक सौंपा।
यह मामला वर्ष 2016 से चल रहा है, जब मधु वैश्य (जिनकी बाद में मृत्यु हो गई और उनके स्थान पर पंकज कुमार गुप्ता व पारुल गोयल विधिक प्रतिनिधि बने) ने दयालबाग स्थित नंदनी एन्क्लेव में एक फ्लैट के लिए बिल्डर फर्म फौजदार एंड सिंह के पास सात लाख रुपये जमा किए थे। निर्धारित समय सीमा के भीतर फ्लैट का निर्माण पूरा न होने और कब्जा न मिलने पर पीड़ितों ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली थी।
बिल्डर पक्ष ने फर्म के विघटन और अपनी सीमित हिस्सेदारी का तर्क देकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया था, लेकिन न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
जिला उपभोक्ता आयोग ने 9 मई, 2024 को अपने मुख्य निर्णय में यह स्पष्ट किया था कि बुकिंग राशि जमा करने के बाद खरीदार उपभोक्ता की श्रेणी में आता है।
आयोग ने पार्टनरशिप एक्ट के तहत सभी भागीदारों को एकल और संयुक्त रूप से उत्तरदायी मानते हुए ब्याज सहित धनराशि लौटाने तथा मानसिक क्षतिपूर्ति व वाद व्यय देने का आदेश दिया था।
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इस निर्णय के खिलाफ विपक्षी नरायन सिंह फौजदार ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, लखनऊ में अपील दायर की थी। राज्य आयोग के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने 30 जुलाई, 2024 को निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए अपील को निरस्त कर दिया था। राज्य आयोग के इसी आदेश के अनुपालन में, अपील के समय जमा की गई धनराशि भी जिला आयोग को ट्रांसफर कर दी गई थी, जिसे प्रतिपक्षी नियमानुसार वापस प्राप्त कर सकता है।
लंबे विधिक संघर्ष के बाद अब जिला उपभोक्ता आयोग ने मुख्य वसूली राशि का चेक डिक्रीदार को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर दी।
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