आरके मार्केटिंग और सर्विस सेंटर को मुआवजा देने का आदेश, खराब फ्रिज न बदलने और वारंटी में पैसे वसूलने पर उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम का निर्णय

आगरा, 17 जून। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने उपभोक्ता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए व्हर्लपूल सर्विस सेंटर और स्थानीय डीलर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया।
आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने विपक्षीगण को निर्देश दिया कि वे उपभोक्ता को एक निश्चित समय सीमा के भीतर नया फ्रिज प्रदान करें या फिर ब्याज सहित पूरी राशि वापस लौटाएं। इसके साथ ही पीड़ित को हुई मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए भारी हर्जाना देने का भी आदेश जारी किया गया।
मामले के अनुसार, किरावली निवासी परिवादी जमील कुरैशी ने अप्रैल, 2023 में सिकंदरा स्थित आर के मार्केटिंग इलेक्ट्रॉनिक्स से 27 हजार रुपये में दस वर्ष की वारंटी के साथ एक व्हर्लपूल फ्रिज खरीदा था। मार्च 2025 में फ्रिज के कंप्रेसर में खराबी आने के कारण कूलिंग बंद हो गई, जिसकी शिकायत डीलर के परामर्श पर कंपनी के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर पर दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद बांकेलाल एंड संस (अधिकृत व्हर्लपूल सर्विस सेंटर) की ओर से भेजे गए मैकेनिकों ने वारंटी अवधि में होने के बावजूद फ्रिज ठीक करने के नाम पर परिवादी से दो अलग-अलग बार में कुल छह हजार रुपये धोखे से वसूल लिए। इसके बावजूद न तो फ्रिज की मरम्मत की गई और न ही उसे बदला गया, जिससे तंग आकर पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि नोटिस मिलने के बाद भी विपक्षीगण की ओर से कोई लिखित जवाब या ठोस तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके चलते मामले की कार्यवाही एकपक्षीय रूप से आगे बढ़ाई गई। पत्रावली पर उपलब्ध टैक्स इनवॉइस, वारंटी कार्ड, शिकायत संख्या और मैकेनिकों द्वारा दी गई जॉब शीट व रसीदों के अवलोकन के बाद आयोग ने माना कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत परिवादी एक उपभोक्ता की श्रेणी में आता है और विपक्षीगण ने वारंटी शर्तों का उल्लंघन करके सेवा में गंभीर कमी की है।
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आयोग ने अपने आदेश में दोनों विपक्षीगण को संयुक्त और पृथक रूप से आदेशित किया है कि वे निर्णय की तिथि से 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसी मूल्य का नया फ्रिज उपलब्ध कराएं। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें फ्रिज की मूल कीमत 27 हजार रुपये पर खरीद की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ राशि आयोग के खाते में जमा करनी होगी। 
इसके अतिरिक्त, आयोग ने विपक्षीगण पर मानसिक उत्पीड़न के लिए दस हजार रुपये, आर्थिक क्षति के रूप में छह हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज की दर छह प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी।
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