ताज एनक्लेव में पार्क की भूमि बेचे जाने की रिपोर्ट लखनऊ तलब, जनप्रतिनिधि के खास का नाम भी!
आगरा, 20 जून। थाना एकता क्षेत्र में फतेहाबाद रोड पर स्थित कॉलोनी ताज एनक्लेव में पार्क की जमीन को फैक्ट्री मालिक को बेचे जाने और पार्क में जेसीबी चलाने का मामला लखनऊ पहुंच गया है। इंटेलीजेंस ने गोपनीय रिपोर्ट दी है। चर्चा है कि एक जनप्रतिनिधि के खास का नाम रिपोर्ट में खोला गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला 16 जून की दोपहर का है। आरोप है कि जेसीबी लेकर 18-20 लोग पहुंचे थे। जेसीबी से जमीन को समतल किया जा रहा था।112 पर आई सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने यह कहकर काम रुकवा दिया कि यह जमीन पार्क की है। नक्शे में पार्क है। जमीन पार्क के रूप में विकसित थी। सौंदर्यीकरण के लिए पौधे लगे हुए थे। आरोप है कि एक जनप्रतिनिधि का खास जमीन को खाली कराना चाहता था। पुलिस ने साफ कह दिया कि मामला तूल पकड़ जाएगा।
कालोनीवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधि के खास ने काम कराने से कुछ दिन पहले एकता थाना पुलिस से संपर्क किया था और कहा था कि सहयोग करना होगा। एक जमीन पर कब्जा लेना है। उस समय यह नहीं बताया था कि जमीन कौन सी है। पुलिस ने यह बोल दिया था कि विरोध हुआ तो काम रुकवा दिया जाएगा। जमीन साफ-सुथरी होनी चाहिए। पुलिस किसी विवाद में नहीं फंसेगी।
अब यह मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से पुलिस अधिकारियों से इसके बारे में पूछा गया। इंटेलीजेंस और एलआईयू ने जमीन पर कब्जे की पूरी रिपोर्ट भेजी है। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने मीडिया को बताया कि जमीन किसकी है, यह राजस्व टीम तय कर सकती है। पुलिस के पास किसी जमीन का कोई अभिलेख नहीं रहता है। मौके पर कोई विवाद न हो, इसलिए पुलिस ने काम रुकवा दिया गया। रिपोर्ट शासन से मांगी गई थी।
कालोनी निवासी महेश कुशवाह ने बताया कि यह पार्क की भूमि उनके घर के ठीक सामने है। वह पर्यटन के लिए दूसरे शहरों के लिए निकले हुए हैं। उनका घर बंद देखकर ही पार्क की भूमि पर कब्जे का प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि यह कालोनी सत्यनारायण जैन ने विकसित की थी। उनके बाद उनका पुत्र विकास जैन कारोबार को देखता है। विकास जैन द्वारा ही उक्त पार्क भूमि का हस्तांतरण मुजाहिद अनीस के पक्ष में किया गया है, जो यहां जूता फैक्ट्री लगाने की मंशा रखते हैं।
कालोनी निवासियों के अनुसार विगत दिवस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विवादित भूमि का निरीक्षण किया तथा उनके द्वारा प्रस्तुत रजिस्ट्रियों, लेआउट एवं अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। निवासियों का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेज स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि विवादित भूमि वर्षों से सोसाइटी के पार्क एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रूप में मौजूद रही है तथा अनेक प्लॉट “पार्क फेसिंग” बताकर अतिरिक्त मूल्य लेकर बेचे गए थे। अब बिल्डर पार्क की जमीन को भी बेचकर मुनाफा कमाना चाहता है।
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