क्लबफुट का समय पर इलाज बच्चे को सामान्य जीवन दे सकता है, ऑर्थोपेडिक सोसायटी ने किया जन-जागरूकता कार्यक्रम
आगरा, 03 जून। विश्व क्लबफुट दिवस पर आगरा ऑर्थोपेडिक सोसायटी द्वारा बाईपास मार्ग स्थित एक निजी अस्पताल में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य क्लबफुट अर्थात जन्मजात टेढ़े पैर की गर्भावस्था में संभावित पहचान, माता-पिता की सही काउंसलिंग, जन्म के बाद शीघ्र और सही उपचार के प्रति जागरूकता फैलाना था।
स्वागत संबोधन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने किया। सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्लबफुट एक इलाज योग्य जन्मजात विकृति है। समय पर पहचान और उचित उपचार से अधिकांश बच्चे सामान्य रूप से चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रैक्टिकल रेफरल पाथवे बनाना आवश्यक है जिससे कोई भी बच्चा केवल देर से पहचान या देर से इलाज के कारण जीवनभर दिव्यांग न रहे।
कार्यक्रम में डॉ. चित्रा जानू ने बताया कि गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड के दौरान क्लबफुट का संदेह होने पर परिवार को डराने के बजाय सही जानकारी और सकारात्मक काउंसलिंग देना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि गाइनेकोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन और ऑर्थोपेडिक सर्जन के बीच बेहतर समन्वय से ऐसे बच्चों को समय पर सही उपचार तक पहुंचाया जा सकता है। डॉ. आर. के. अरोड़ा ने भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन एवं पैनल डिस्कशन डॉ. नेहारिका, डॉ. शुभम खंडेलवाल और डॉ. सिद्धार्थ दुबे द्वारा किया गया। डॉ. रिचा सिंह, डॉ. अशोक विज, डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, डॉ. विशाल तथा अन्य विशेषज्ञों ने विचार रखे।
चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि क्लबफुट में माता-पिता की कोई गलती नहीं होती। यह कोई अंधविश्वास, दंड या सामाजिक कलंक नहीं है, बल्कि एक चिकित्सकीय समस्या है जिसका सफल उपचार संभव है।
कार्यक्रम में गाइनोकोलॉजी एसोसिएशन, रेडियोलॉजी एसोसिएशन, पीडियाट्रिक एसोसिएशन आर्थोपेडिक एसोसिएशन और आईएमए से जुड़े चिकित्सकों की सहभागिता रही।
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