बिना व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस अब नहीं मिलेगा पीयूसीसी और फिटनेस सर्टिफिकेट!

आगरा, 01 मई। वरिष्ठ अधिवक्ता व सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के सी जैन का दावा है कि देश में अब बिना वाहन स्थान ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) के सक्रिय हुए किसी भी वाहन को न तो प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) मिलेगा और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। 
जैन के मुताबिक, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी से यह स्पष्ट हुआ। यह निर्णय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 19 दिसंबर 2025 के परिपत्र में स्पष्ट रूप से दर्ज है, जिसमें वाहन की हर महत्वपूर्ण प्रक्रिया को वाहन स्थान ट्रैकिंग डिवाइस से जोड़ने की बात कही गई है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली के नियम 125एच के तहत वर्षों पहले से यह अनिवार्य किया जा चुका है कि सभी सार्वजनिक सेवा वाहन और नियम 90(5) राष्ट्रीय परमिट वाले वाहनों में वीएलटीडी और पैनिक बटन लगे होने चाहिए। लेकिन वास्तविकता यह है कि देश के अधिकांश राज्यों में इन नियमों का पालन बहुत ही कम स्तर पर हुआ है। मंत्रालय ने स्वयं अपने परिपत्र में स्वीकार किया है कि वाहन स्थान ट्रैकिंग डिवाइस की सक्रियता बेहद कम है, जो यह दर्शाता है कि नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए और उनका जमीनी स्तर पर सही तरीके से पालन नहीं हुआ। 
अब सरकार ने इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए वाहन के पूरे जीवनचक्र को वीएलटीडी से जोड़ने का निर्णय लिया है। नए वाहनों के पंजीकरण, पुराने वाहनों के नवीनीकरण और स्वामित्व हस्तांतरण के समय वीएलटीडी की अनिवार्य जांच की जाएगी और यह व्यवस्था 01 जनवरी 2026 से लागू की गयी है। इसके साथ ही, 1 अप्रैल 2026 से फिटनेस प्रमाण पत्र और पीयूसीसी जारी करने से पहले वीएलटीडी की सक्रियता की जांच अनिवार्य कर दी गई है। यदि वाहन में यह डिवाइस सक्रिय नहीं पाया जाता है, तो उसे फिटनेस या पीयूसीसी किसी भी हालत में नहीं मिलेगा। इसी प्रकार राष्ट्रीय परमिट जारी करने से पहले भी वीएलटीडी की जांच पहले से ही आवश्यक कर दी गई है।
वीएलटीडी और पैनिक बटन - यात्रियों की सुरक्षा की जीवनरेखा
वाहन स्थान ट्रैकिंग डिवाइस केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके माध्यम से वाहन की वास्तविक समय में लोकेशन ट्रैक की जा सकती है और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन का सक्रिय होना अत्यंत आवश्यक है। यदि ये उपकरण सक्रिय नहीं हैं, तो इसका सीधा अर्थ है कि आपात स्थिति में न तो वाहन को ट्रैक किया जा सकता है और न ही सहायता समय पर पहुंच सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में 12 मई को होगी सुनवाई
अधिवक्ता जैन ने बताया कि 12 मई को सर्वोच्च न्यायालय में इस विषय पर सुनवाई निर्धारित है। के सी जैन ने इस संबंध में विगत 08 मई 2025 को न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। 
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