बड़ा खुलासा: आगरा में सौ करोड़ की जीएसटी चोरी करने वाले गैंग का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार

आगरा, 29 मई। थाना लोहामंडी पुलिस, साइबर सेल और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है, जिसने बोगस फर्मों के जरिए करीब सौ करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग कर सरकार को करोड़ों रुपये के जीएसटी राजस्व का नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने तीन आरोपियों अमन डंग, सौरभ सिंह और 68 वर्षीय राम अवतार शर्मा को गिरफ्तार किया है। 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरोह लंबे समय से कई राज्यों में सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से फर्जी कंपनियां तैयार कर टैक्स चोरी का नेटवर्क संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरोह बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-फरोख्त के केवल कागजों पर कारोबार दिखाता था। आरोपी फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार कर अलग-अलग फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध लाभ दिलाते थे। इससे संबंधित कारोबारी टैक्स बचाने में सफल हो जाते थे, जबकि सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह का पूरा नेटवर्क डिजिटल दस्तावेजों और फर्जी पहचान पत्रों के सहारे संचालित होता था। आरोपी नकली आधार कार्ड, पैन कार्ड, रेंट एग्रीमेंट और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बोगस फर्में रजिस्टर कराते थे। बाद में इन फर्मों को दूसरे राज्यों के कारोबारियों को बेच दिया जाता था, ताकि फर्जी बिलिंग का सिलसिला जारी रखा जा सके।
खबरों के अनुसार, गिरफ्तार 68 वर्षीय राम अवतार शर्मा की भूमिका जांच एजेंसियों को सबसे ज्यादा चौंकाने वाली लगी है। पुलिस के अनुसार, वह गिरोह में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और फर्मों की स्थापना कराने में विशेषज्ञ माना जाता था। उसकी मदद से कई कंपनियों को कागजों पर खड़ा किया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डाटा बरामद किया है। साइबर सेल अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। इसके तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब उन कारोबारियों और फर्मों की भी जांच कर रही है, जिन्होंने इन फर्जी कंपनियों के जरिए आईटीसी का लाभ लिया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे सिंडिकेट में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर टैक्स चोरी के इस खेल को संचालित कर रहे थे। 
एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह का कहना है कि प्रारंभिक जांच में लगभग 100 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनसे मिली जानकारी के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। 
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