आगरा की फर्म से 5.24 लाख ठगे, फर्जी एयरफोर्स अफसर बनकर लगाया चूना

आगरा, 29 मई। साइबर ठगों द्वारा खुद को खेरिया एयरफोर्स स्टेशन का अधिकारी बताकर “टेकसैल्यूट इनकॉरपोरेशन” फर्म से 5.24 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। 
खबरों के मुताबिक, फर्जी परचेज ऑर्डर भेजकर सिलिकोन सीलेंट मटेरियल मंगाया गया और बाद में गेट पास व अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर 11 ट्रांजैक्शन में रकम ट्रांसफर करा ली गई। पीड़ित की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शाहगंज क्षेत्र के केदार नगर निवासी पुनीत उप्रेती ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उनके पिता के नाम से “टेकसैल्यूट इनकॉरपोरेशन” नाम की फर्म संचालित होती है। कुछ दिन पहले उनकी फर्म को एक परचेज ऑर्डर प्राप्त हुआ। यह ऑर्डर कथित तौर पर खेरिया एयरफोर्स स्टेशन के सीनियर अकाउंट ऑफिसर मेजर कुलदीप सिंह की ओर से भेजा गया था। ऑर्डर में सिलिकोन सीलेंट मटेरियल की सप्लाई मांगी गई थी।
एयरफोर्स स्टेशन से ऑर्डर मिलने पर फर्म को किसी तरह का शक नहीं हुआ। पीड़ित पक्ष ने तय समय में मटेरियल तैयार कराया, उसका बिल बनाया और माल को डिलीवरी के लिए खेरिया एयरफोर्स स्टेशन भेज दिया। 
लेकिन यहीं से ठगों का असली खेल शुरू हुआ।पीड़ित जब माल लेकर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा तो कथित मेजर कुलदीप सिंह ने फोन पर उसे गेट के बाहर ही रुकवा दिया। इसके बाद उसने कहा कि डिफेंस क्षेत्र में डिलीवरी की प्रक्रिया सामान्य संस्थानों से अलग होती है। माल को अंदर ले जाने और गेट एंट्री पास जारी करने के लिए पहले कमांडिंग ऑफिसर के खाते में बिल की रकम जमा करनी होगी। भरोसा दिलाया गया कि अकाउंट वेरिफिकेशन होते ही पूरी राशि तत्काल वापस कर दी जाएगी और माल की एंट्री भी हो जाएगी।
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सरकारी प्रक्रिया और एयरफोर्स का नाम सुनकर पीड़ित पूरी तरह झांसे में आ गया। ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी भेजी और रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया। पीड़ित ने अपने निजी कोटक महिंद्रा बैंक खाते और फर्म के करंट अकाउंट से कुल 11 ट्रांजैक्शन के जरिए पांच लाख, चौबीस हजार, तीन सौ चौरासी रुपये ट्रांसफर कर दिए।
रकम भेजने के बाद जब काफी देर तक न तो गेट पास मिला और न ही माल अंदर जाने दिया गया, तब पीड़ित को शक हुआ। उसने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कथित अधिकारी का फोन बंद हो गया। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर टीम अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है, जिनका इस्तेमाल इस ठगी को अंजाम देने में किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना सत्यापन किसी भी खाते में रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।
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