आगरा कॉलेज के पांच पूर्व प्राचार्यों ने किया ऐसा काम, विजिलेंस ने दर्ज कर लिया मुकदमा

आगरा, 13 मई। पूर्व में भी कई मामलों में विवादों का केंद्र रहा आगरा कॉलेज एक बार फिर गम्भीर विवादों में फंस गया है। पांच पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर प्रबंध समिति की अनुमति के बिना 66 शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों को संविदा सेवा पर रखने का आरोप है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विजिलेंस ने चार साल की जांच के बाद थाना आगरा सेक्टर में पूर्व प्राचार्य डॉ. मनोज रावत, डॉ. अशोक विक्रम सिंह, डॉ. उमेश चंद्र शर्मा, नरेंद्र सिंह और डॉ. अनिल कुमार गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। 
डा. अशोक विक्रम सिंह वर्ष 2003 से 2008 तक प्राचार्य रहे। इनके बाद डा. यूसी शर्मा वर्ष 2009 तक रहे। डा. मनोज रावत ने वर्ष 2016 तक कार्यभार संभाला। एक साल डा. नरेंद्र सिंह प्राचार्य रहे। वर्ष 2017 से 2019 तक डा. एके गुप्ता प्राचार्य रहे थे।
यह प्राथमिकी सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक सौदान सिंह ने दर्ज कराई। जांच में सामने आया है कि बिना प्रबंध समिति की अनुमति के शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों को संविदा पर नियुक्त किया गया और उन्हें सेवा विस्तार भी दिया गया। इसे अनैतिक तरीके से लाभ देने का कृत्य माना गया है।
इस मामले की खुली जांच वर्ष 2022 में शासन के आदेश पर शुरू हुई थी। आरोप है कि इन नियुक्तियों के लिए प्रबंध समिति से अनुमोदन नहीं लिया गया। इनसे संबंधित कोई कागजात कॉलेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि 07 दिसंबर, 2017 को हुई प्रबंधन समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिन कर्मचारियों के पास वैध नियुक्ति पत्र अथवा अनुमोदन नहीं है, उन्हें कार्यमुक्त किया जाएगा। इसके बावजूद भी कुछ कर्मचारियों को सेवा विस्तार दिया गया। जांच में इसे अनैतिक तरीके से लाभ का कृत्य माना गया।
एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने इस मामले में मीडिया को बताया कि शासन द्वारा मामले में खुली जांच के आदेश दिए गए थे। आरोपों की पुष्टि होने पर पांच प्राचार्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। 
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