फ्लाईओवर से गिरकर लोगों की मौत रोकने को आईआरसी मानकों का पुनर्मूल्यांकन करें || डॉ संजय चतुर्वेदी ने जिला सड़क सुरक्षा समिति को भेजा तथ्यात्मक अध्ययन

आगरा, 16 अप्रैल। शाहदरा फ्लाईओवर से दो युवकों की दुखद मृत्यु के पश्चात जिला सड़क सुरक्षा समिति के पूर्व सदस्य एवं वरिष्ठ अस्थिरोग शल्य चिकित्सक डॉ. संजय चतुर्वेदी ने फ्लाईओवरों की रेलिंग ऊँचाई के विषय में तथ्यात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए जिला सड़क सुरक्षा समिति से इस विषय को बैठक में सम्मिलित करने का विनम्र अनुरोध किया है।
भारतीय शहरों की यातायात वास्तविकता — एक महत्वपूर्ण पहलू
भारत के अधिकांश छोटे एवं मध्यम शहरों — विशेषकर आगरा जैसे नगरों में — कुल वाहनों में 70% से अधिक संख्या दोपहिया वाहनों की है। इन वाहनों की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि ये सड़क के किनारे-किनारे चलते हैं, क्योंकि:
भारी वाहन मध्य लेन घेरे रहते हैं। दोपहिया चालक शीघ्र निकलने हेतु फ्लाईओवर के किनारे वाली लेन को प्राथमिकता देते हैं। फ्लाईओवर के मोड़ (curve) पर केन्द्रापसारक बल के कारण दोपहिया वाहन स्वाभाविक रूप से बाहरी रेलिंग की ओर खिंचते हैं। थोड़ी-सी भी फिसलन, गड्ढा या अचानक ब्रेक की स्थिति में रेलिंग ही एकमात्र अवरोध होती है अर्थात फ्लाईओवर पर रेलिंग का सर्वाधिक सामना दोपहिया वाहनों से होता है और यही वह वर्ग है जो सबसे अधिक असुरक्षित है।
वर्तमान IRC मानक और उसकी सीमाएँ
भारतीय सड़क कांग्रेस द्वारा प्रकाशित IRC:SP:90-2010 के खंड 6.4.4 के अनुसार फ्लाईओवर पर रेलिंग की न्यूनतम ऊँचाई 1.1 मीटर (लगभग 3.6 फीट) निर्धारित है। डॉ. चतुर्वेदी का कहना है कि यह मानक भी व्यावहारिक दृष्टि से अपर्याप्त प्रतीत होता है: "एक सामान्य भारतीय कम्यूटर मोटरसाइकिल की सीट की ऊँचाई लगभग 2.5 फीट होती है। उस पर बैठे व्यक्ति का गुरुत्व केंद्र (Centre of Gravity) सड़क की सतह से लगभग 3.5 फीट की ऊँचाई पर होता है। दुर्घटना के क्षण में मोटरसाइकिल रेलिंग से टकराकर फुलक्रम की भाँति कार्य करती है और सवार का शरीर रेलिंग के ऊपर से बाहर निकल जाता है। इस प्रकार IRC की 3.6 फीट की रेलिंग वाहन को रोक सकती है, परन्तु सवार को नहीं बचा सकती। जब हमारे शहरी फ्लाईओवरों पर 70% से अधिक ट्रैफिक दोपहिया है, वे स्वभाव से किनारे चलते हैं — तो यह मानक उस वास्तविकता को ध्यान में रखकर पुनर्निर्धारित होना चाहिए।"
डॉ. संजय चतुर्वेदी ने जिला सड़क सुरक्षा समिति से अनुरोध किया कि निम्नलिखित बिंदुओं को अपनी आगामी बैठक में सम्मिलित कर चर्चा की जाए:
IRC:SP:90-2010 के रेलिंग मानकों की समीक्षा — दोपहिया वाहनों की संख्या, उनकी लेन प्रवृत्ति एवं बायोमैकेनिकल वास्तविकता को दृष्टिगत रखते हुए।
आगरा के सभी फ्लाईओवरों का सुरक्षा सर्वेक्षण — और आवश्यकतानुसार रेलिंग को न्यूनतम 5 से 6 फीट की ठोस कंक्रीट क्रैश बैरियर से प्रतिस्थापित करने की संस्तुति।
फ्लाईओवर के वक्र (curve) स्थलों पर विशेष रूप से सुदृढ़ बैरियर की व्यवस्था।
NHAI एवं IRC को पत्र प्रेषित कर राष्ट्रीय स्तर पर मानक संशोधन हेतु सुझाव देना।
सभी फ्लाईओवरों पर CCTV कैमरे लगाने की संस्तुति।
डॉ. चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया - "मैं किसी पर कोई आरोप नहीं लगाता। एक चिकित्सक के रूप में मेरी पीड़ा यह है कि जो मृत्यु हो रही हैं, वे रोकी जा सकती थीं। मेरा प्रयास केवल इतना है कि जिला सड़क सुरक्षा समिति इस विषय पर विचार करे और उचित संस्तुति उच्च अधिकारियों तक पहुँचाए। दो परिवारों की पीड़ा व्यर्थ न जाए।"
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