डॉ संजय चतुर्वेदी का खुला पत्र- एमजी रोड पर मेट्रो निर्माण के दौरान यातायात अव्यवस्था की जवाबदेही तय करे प्रशासन

आगरा, 04 अप्रैल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जिला शाखा के पूर्व सचिव एवं सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) के पूर्व सदस्य डॉ. संजय चतुर्वेदी ने एक खुला पत्र जारी करते हुए प्रशासन एवं संबंधित सभी एजेंसियों का ध्यान एमजी रोड पर मेट्रो निर्माण के दौरान उत्पन्न गंभीर यातायात अव्यवस्था की ओर आकर्षित किया है।
पत्र में कहा गया है कि वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि निर्माण कार्य बिना समुचित Traffic Management Plan (TMP) के प्रारम्भ किया गया, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिदिन भारी जाम, आपातकालीन सेवाओं में विलम्ब तथा आम नागरिकों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह केवल एक निर्माणगत समस्या नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से योजना, समन्वय एवं जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
जिला सड़क सुरक्षा समिति की भूमिका केवल बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे कार्यों में पूर्व स्वीकृति, समन्वित कार्यवाही एवं सतत निगरानी सुनिश्चित करना इसकी मूल जिम्मेदारी है। यह दायित्व किसी व्यक्ति विशेष या सदस्यता तक सीमित न होकर एक सतत संस्थागत दायित्व है, जिसे प्रभावी रूप से निभाया जाना अपेक्षित है। अतः इस संदर्भ में निम्नलिखित त्वरित एवं समयबद्ध कार्यवाही अपेक्षित है—
1. प्रत्येक निर्माण स्थल हेतु Traffic Management Plan (TMP) का पुनर्मूल्यांकन कर उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए।
2. मेट्रो, ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम एवं लोक निर्माण विभाग के मध्य समन्वित नियंत्रण हेतु एक नोडल अधिकारी (Unified Command) नियुक्त किया जाए।
3. पीक आवर्स में निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाकर भारी कार्य केवल रात्रिकाल में संचालित किया जाए।
4. वैज्ञानिक डायवर्जन योजना, स्पष्ट साइनबोर्ड एवं डिजिटल सूचना प्रणाली (जैसे Google Maps अपडेट) लागू की जाए।
5. क्षतिग्रस्त सड़कों का तत्काल अस्थायी सुधार (Patchwork एवं Lane Marking) कराया जाए।
6. DRSC द्वारा साप्ताहिक स्थल निरीक्षण एवं सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट जारी की जाए, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
पत्र में कहा गया है कि मेट्रो परियोजना निस्संदेह शहर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, किन्तु यदि इसके साथ प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन एवं संस्थागत समन्वय सुनिश्चित नहीं किया गया, तो यही विकास नागरिकों के लिए असुविधा, आर्थिक हानि एवं जोखिम का कारण बन जाता है। अतः जिला प्रशासन को समन्वित एवं जवाबदेह कार्यवाही सुनिश्चित करनी चाहिए।
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