बंदरों को पकड़ने और पुनर्वास के लिए स्थानीय निकायों को स्पष्ट निर्देश, प्रक्रिया सरल की गई, जिलास्तरीय निगरानी समिति गठित
आगरा, 08 अप्रैल। सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक ने बताया कि मानव–बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के उद्देश्य से शासन द्वारा अंतिम कार्ययोजना जारी कर दी गई है। इसके अंतर्गत बंदरों को पकड़ने, स्थानांतरण एवं प्रबंधन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं।
वर्तमान प्रावधानों के अनुसार बंदरों (रिसस मकाक) को पकड़ने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इसके परिणामस्वरूप संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई संबंधित नगर निगम, नगर निकाय एवं ग्राम पंचायत द्वारा कराई जाएगी। इस कार्य को केवल प्रशिक्षित एवं अनुभवी व्यक्तियों से ही कराया जाएगा, जिनकी सेवाएं स्थानीय निकायों द्वारा ली जाएंगी। पकड़े गए बंदरों को प्राथमिकता के आधार पर उसी जनपद के वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। यदि संबंधित जनपद में उपयुक्त वन क्षेत्र उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि संरक्षित क्षेत्रों में बंदरों को नहीं छोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि बंदरों को पकड़ने, उनके परिवहन एवं मुक्त करने की समस्त प्रक्रिया में 16 अक्टूबर, 2018 को जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। इस कार्य की प्रभावी निगरानी के लिए जिला स्तरीय समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। समिति में पुलिस विभाग, वन विभाग, नगर निकाय, पशुपालन विभाग, पंचायत विभाग के अधिकारी तथा एक नामित गैर-सरकारी संस्था के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
इसके अतिरिक्त स्थानीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बंदरों को भोजन आसानी से उपलब्ध न हो सके और उनकी आवाजाही में कमी आए। सभी प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे, जिनमें वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी आमजन को आवश्यक तकनीकी जानकारी प्रदान करेंगे।
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