चैंबर चुनाव: पैनल सेकेंडरी!! व्यक्तिगत जीत के प्रयासों में जुटे प्रत्याशी, आजमाए जा रहे कूटनीतिक दांवपेच

आगरा, 05 मार्च। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी आगरा के वार्षिक चुनावों में प्रत्याशियों के बीच मतदाताओं को अपने पाले में खींचने की जोर-आजमाइश तेज हो गई है। 
चुनावों में अध्यक्ष पद पर मनोज बंसल और मनोज गुप्ता अपना भाग्य आजमा रहे हैं। उपाध्यक्ष के दो पदों के लिए गिरीश गोयल, अम्बा प्रसाद गर्ग और नीतेश अग्रवाल और कोषाध्यक्ष के एक पद के लिए नीरज अग्रवाल, सतीश अग्रवाल और विनय मित्तल मैदान में हैं। इसके अलावा 14 समूहों से 32 कार्यकारिणी सदस्य चुने जाने हैं।
प्रत्यक्ष तौर पर मनोज बंसल, अम्बा प्रसाद गर्ग, नीतेश अग्रवाल और विनय मित्तल का एक पैनल बताया जा रहा है। जबकि मनोज गुप्ता, गिरीश गोयल और सतीश अग्रवाल का दूसरा पैनल बताया जा रहा है। पिछले चुनावों भी भाग्य आजमा चुके नीरज अग्रवाल एक अन्य धड़े के सहयोग से पूरी दमखम दिखा रहे हैं।
मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ सभी प्रत्याशियों का प्रचार अभियान भी तेज हो चला है। इस बीच जानकारी मिली है कि कुछ प्रत्याशियों ने अपने स्वयं के लिए वोटरों पर पकड़ बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। अंदरखाने में सिंगल वोट के लिए कोशिशें की जा रही हैं। अपना चुनाव सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। पैनल को सेकेंडरी किया जा रहा है। इसकी जानकारी अन्य प्रत्याशियों को भी हो गई है और वे उसी के अनुरूप रणनीति में बदलाव करने लग गए हैं।
चुनावों में "चाचा-भतीजे" को लेकर भी चर्चा बनी हुई है। यूँ तो दोनों अलग-अलग पैनल से और अलग-अलग पदों के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन अंदरखाने में दोनों एक-दूसरे के लिए भी वोट जुटाने को प्रयासरत हैं। इसे लेकर पैनलों में विरोधाभास भी सुनाई देने लगा है। 
उपाध्यक्ष के दो पदों पर तीन प्रत्याशियों के होने से तीनों को ही वोट जुटाने के लिए मेहनत करनी पड़ रही है। वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए कूटनीति भी अपनाई जा रही है। एक प्रत्याशी के बारे में अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं कि वह चुनाव मैदान से हट रहे हैं, लेकिन इस उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी ने ऐसी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। इस प्रत्याशी ने दावा किया कि अन्य प्रत्याशी अपनी जीत के प्रति सशंकित हो उठे हैं इसीलिए इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं।
कोषाध्यक्ष पद के लिए त्रिकोणात्मक संघर्ष बना हुआ है। शुरुआती दिनों में अनुमान लगाया जा रहा था कि इन तीनों में से कोई दो ही चुनाव मैदान में रह जाएंगे, लेकिन अभी तक इसके आसार नजर नहीं आ रहे हैं। चुनावों में नाम वापसी की तिथि नौ मार्च है। यदि इनमें से किसी ने नाम वापस नहीं लिया तो बाजी किसके हाथ लगेगी यह देखना रोचक होगा।
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