नगर आयुक्त जिस बैठक का सहारा ले रहे उसमें केवल जलपान के लिए अधिकारी नामित करना था || महापौर ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, खंडेलवाल पर लगाए वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, कड़ी कार्रवाई की मांग

आगरा, 24 मार्च। नगर निगम सदन की बैठक में नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल के विरुद्ध पास हुए निंदा प्रस्ताव को महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिया।
महापौर ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में लिखा कि नगरायुक्त नगर निगम की अधिनियम की धारा 117-6 (बी), टेंडर बॉक्स, रेट लिस्ट का दुरुपयोग करके निजी स्वार्थ में अपने चेहते ठेकेदारों को ऑफलाइन टेण्डर के माध्यम से करोड़ों रूपये कार्य देकर घोर वित्तीय अनियमिततायें की हैं, इसकी शिकायत शासन को कर दी गई। इससे क्षुब्ध होकर नगरायुक्त सामान्य सदन से बच रहे हैं। पूर्व में भी उन्होंने अंतिम समय तक बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया था। 
महापौर ने पत्र में लिखा कि पार्षदों में विकास कार्यों की अनदेखी करने को लेकर भी नगरायुक्त सहित निगम के अन्य अधिकारियों के खिलाफ रोष है उससे बचने को भी उनके द्वारा सदन की बैठक न कराने के लिए षडयंत्र रचा गया। जबकि नियमानुसार सदन बुलाने व स्थगित करने का अधिकार महापौर का है।
उन्होंने लिखा कि पूर्व में भी दिनांक 21.07.2023 को नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल के कार्यकाल में ही सदन की बैठक हो चुकी है, उस दौरान भी लोकसभा का मानसून सत्र चल रहा था। पत्र में कहा गया कि नगरायुक्त द्वारा जिस उच्चस्तरीय विधानमंडल की बैठक का जिक्र किया है, उस बैठक में जिलाधिकारी द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से अंकित है कि नगरायुक्त उक्त बैठक में जलपान की समुचित व्यवस्था करने के लिए एक अधिकारी को नामित करें। 
पत्र में कहा गया कि नगर निगम स्तर पर नगर आयुक्त द्वारा एजेण्डा एवं सूचना पत्र प्रेषित न करना, अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से बचने, पार्षदों के जवाब-सवालों से बचने तथा अपने वित्तीय अनियमितता के कृत्यों को छिपाने आदि के लिए इनके द्वारा केवल वर्णित शासनादेश एवं समिति की बैठक का बहाना लिया गया है जो नगर निगम सदन की घोर अवमानना है। नगर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि अधिकारी विहीन सदन संचालित हुआ हो, जो नगर निगम के इतिहास में काला दिवस होगा।
पत्र में मांग की गई है कि नगर आयुक्त के विरुद्ध सदन की अवमानना करने, घोर अनुशासनहीनता करने, नगर निगम अधिनियम 1959 की धाराओं का दुरुपयोग करने, पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने, आदि-आदि, कारणों की जाँच कराकर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जाए।
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