"समंदर भी कहां देता है रास्ता किसी को, राम हो जाने से पहले" || फन्नी ढाबा कवि सम्मेलन में बही हास्य-व्यंग्य, गीत और गजल की त्रिवेणी

आगरा, 07 मार्च। इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन एवं सृजन दीप्ति के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य और हास्य से सराबोर “फन्नी ढाबा कवि सम्मेलन” का आयोजन शनिवार को बाईपास मार्ग स्थित एक होटल में सम्पन्न हुआ। 
मुजफ्फरनगर से आए मशहूर शायर अजहर इकबाल ने अपनी प्रभावशाली पंक्तियों से समां बांध दिया-
“हज़ारों साल से प्रतीक्षारत थी ये धरती, धाम हो जाने से पहले।
समंदर भी कहां देता है रास्ता, किसी को राम हो जाने से पहले।”
मेरठ के डॉ. अनुज त्यागी ने जीवन के संघर्ष और अनुभवों को शब्द देते हुए कहा -
“बर्बाद सब लगे कभी कभी लगे आबाद है।
कशमकश है दे रही जिंदगी में स्वाद है।"
दिल्ली के उपेन्द्र पांडेय ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत अपनी रचना से माहौल को भावुक कर दिया—
“निगाहें झुकती सजदें में वहाँ सम्मान क्या होगा? 
वतन पर जाँ लुटाने से बड़ा बलिदान क्या होगा?”
कवयित्री सलोनी राणा ने मानवीय संवेदनाओं को व्यक्त करते हुए कहा -
“कल की कुछ भी ख़बर कुछ पता तो नहीं।
तू भी सबकी तरह है जुदा तो नहीं।
चाहे कितना भी ख़ुद को बड़ा मान लें..
आदमी आदमी है ख़ुदा तो नहीं।”
गीतकार अभिषेक शर्मा ने भी अपनी भावपूर्ण रचना से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया-
“जिसे हमदर्द हम समझे वजह वो दर्द की निकला
था जिसका हौसला हमको यकीं वो खोखला निकला।”
स्थानीय हास्य कवि पवन आगरी ने समसामयिक व्यंग्य से भरपूर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को गुदगुदाया।
इससे पूर्व समारोह का शुभारम्भ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे फुटवियर निर्यातक पूरन डावर, डॉ. एमपीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के संचालक ए.के. सिंह, ज्योतिषाचार्य डॉ. सरस्वती देवी कृष्णा गौड़ एवं इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के वाइस चेयरमैन राजेश गर्ग ने संयुक्त रूप से किया।
अतिथियों का स्वागत संयोजक अभिषेक शर्मा इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के महासचिव अजय शर्मा, संयोजक ब्रजेश शर्मा एवं सृजन दीप्ति के अध्यक्ष सतीश देव त्यागी, उपाध्यक्ष डा. रणवीर त्यागी, सचिव राकेश चन्द्र शुक्ला एवं कोषाध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा ने किया। 
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