दावा: देशभर के महाविद्यालयों को मिलेगी करोड़ों रुपये की राशि वापस, शिक्षक बनने की राह में अलग-अलग 'एफडीआर का रोड़ा' दूर
आगरा, 17 जनवरी। टीचर्स एजुकेशन क्षेत्र से जुड़े पीयूष भार्गव ने एक विज्ञप्ति में दावा किया है कि अब किसी महाविद्यालय को चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के अंतर्गत बीए-बीएड, बीएससी-बीएड या बीकॉम-बीएड शुरू करने के लिए 12-12 लाख रुपये की अलग-अलग एफडीआर जमा नहीं करनी पड़ेंगी।
विज्ञप्ति के अनुसार, यह राहत पीयूष भार्गव द्वारा आरटीआई के तहत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से पूछे गए सवाल के बाद मिली है। सवाल में पूछा गया था कि इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के तहत तीन पाठ्यक्रम आरंभ करने पर कितने रुपये की एफडीआर जमा करनी होगी? इसके जवाब में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा भेजी गई नियमावली से असंतुष्ट पीयूष भार्गव ने जब आरटीआई अपील की तो अपील का जवाब देने के लिए 20 जनवरी की तारीख तय कर दी गई, लेकिन उससे पूर्व ही 17 जनवरी को भूल सुधारते हुए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की उत्तर क्षेत्रीय कमेटी ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए मिनट्स में स्पष्ट कर दिया कि इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन एक ही प्रोग्राम है। अत: इसके अंतर्गत सभी पाठ्यक्रमों के लिए 12 लाख की एक ही एफडीआर ली जाएगी।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की भूल के चलते विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा जमा करवाई गई अलग-अलग एफडीआर की अतिरिक्त जमा राशि भी परिषद द्वारा महाविद्यालयों को वापस की जाएगी।
पीयूष भार्गव ने आरटीआई अपील और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड हुए निर्णय को बताते हुए कहा कि देशभर के महाविद्यालयों को अब करोड़ों रुपये की राशि वापस मिलेगी। साथ ही, इस पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए आवेदन करने वाले महाविद्यालय को अब केवल 12 लाख रुपये ही जमा करवाने पड़ेंगे।
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