जो न नूतन है न पुरातन, जो सृष्टि के साथ आया वो है सनातन: शंकराचार्य

आगरा, 15 जनवरी। जयपुर हाउस स्थित माधव भवन के उद्घाटन के लिए यहां आए शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने विगत सायं पत्रकारों वार्ता करते हुए कहा कि जो न नूतन है न पुरातन, जो सृष्टि के साथ आया वो है सनातन।    
भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाए जाने के सवाल पर कहा कि बनाया उसे जाता है जो हो न। भारत हिन्दू राष्ट्र कब नहीं था। भारत के संविधान में भले ही हिन्दू राष्ट्र न हो, परन्तु सनातन सृष्टि के प्रारम्भ से है। जो लोग भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं उनकी भावना अच्छी है, परन्तु शब्द प्रयोग ठीक नहीं है। संविधान बहुत छोटी चीज है, जो बनती बिगड़ती है। हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात पर राष्ट्र के प्रति प्रेम कम अपने राजनीतिक एजेन्डे और अपनी कुर्सी को बनाए रखने का दृष्टिकोण अधिक है। संविधान सिर्फ व्यवस्था का नाम है जो बनते बिगड़ते रहते हैं। संविधान कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। जिन्हें चुनकर भेजा है उनकी जिम्मेदारी है संविधान को ठीक करना। 
ओबेसी के कथन कि बुर्का पहनकर भी महिला प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ सकती है, के सवाल पर कहा कि लोकतंत्र है, गधा भी प्रधानमंत्री बन सकता है। जब ज्यादा पशु इकट्ठे हो जाएंगे तो उनका प्रतिनिधि बन जाएगा। मनुष्य भी एक पशु ही है।
किसी भी संकट में हिन्दू एकजुट क्यों होता, प्रश्न के सवाल पर कहा कि हमारा सनातन धर्म का रक्त शुद्ध नहीं रहा। विषाक्त हो चुका है। जब शरीर का रक्त विषाक्त हो जाता है तो फोड़े फुंसी, कई प्रकार की बीमारी उत्पन्न हो जाती हैं। आज सनातन के विषाक्त रक्त को शोधन की आवश्यकता है। जो सनातन धर्मावलम्बी हैं, वो तो गर्व से कहें कि हम सनातनी हैं।
उन्होंने कहा कि सत्ता का चाल, चरित्र चेहरा एक होता है। जो कुर्सी पर बैठता है वह वोट गिनता है। सनातन धर्म के संस्कारित, संगठित होने से रक्त शोधन होगा। सनातन धर्म को सत्ता की जरूरत नहीं है। सत्ता धर्म के सामने झुकती है। सत्ता में दोष ही दोष हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से सुमित ढल, संदीप ढल, जयदीप कपूर, विजय सामा, विजय गोयल उपस्थित थे।
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