एक साल में 31 प्रतिशत बढ़ गए सड़क हादसे, पैदल यात्री सुरक्षा ऑडिट कराया जाए
आगरा, 22 जनवरी। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ और जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य डॉ. संजय चतुर्वेदी के अनुसार ताजनगरी में सड़कों पर सफर करना और पैदल चलना जानलेवा साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले साल के मुकाबले 31% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इन भयावह आंकड़ों को देखते हुए डॉ चतुर्वेदी ने जिले में ‘पैदल यात्री सुरक्षा ऑडिट' की मांग की है।
डॉ. संजय चतुर्वेदी ने जिला सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष को पत्र भेजा है। इसमें बताया गया है कि वर्ष 2025 में जिले में 684 सड़क मौतें हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि असुरक्षित बुनियादी ढांचा पैदल यात्रियों की मौत का सबसे बड़ा कारण है ।
डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि नेशनल हाईवे-2, एनएच-44 और आगरा बाईपास पर करोड़ों की लागत से बने फुट ओवरब्रिज और अंडरपास ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गए हैं। इनमें लिफ्ट, रैंप और लाइटिंग की व्यवस्था नहीं है।
इस कारण बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मरीज और दिव्यांग इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते और सड़क पार करते समय हादसों का शिकार हो रहे हैं ।
उन्होंने मांग की कि जिले भर में तत्काल एक ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराया जाए और आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के तहत सुगम रास्ता सुनिश्चित किया जाए। पत्र में प्रस्तावित ऑडिट का दायरा (सारांश) सुझाते हुए कहा गया है कि फ्रंट ऑफ बेस/सबवे की सुगमता (लिफ्ट, रैंप, एस्केलेटर, प्रकाश व्यवस्था), पैदल यात्री क्रॉसिंग, साइनबोर्ड, रेलिंग और क्रैश बैरियर; शहरी क्षेत्रों में फुटपाथ की उपलब्धता और निरंतरता, स्कूलों, अस्पतालों, बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों के पास स्थित उच्च जोखिम वाले स्थान को शामिल किया जाना चाहिए।
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