धनुष भंग होते ही रघुवीर के गले पड़ी सिया की जयमाला

आगरा, 04 अक्टूबर। “देखि रूप मोहिं नयन न तृप्ता” भाव मंच पर साकार हुआ तो पुष्प वाटिका में राम-जानकी प्रथम मिलन से भक्त भाव-विभोर हो गए। धनुष यज्ञ में श्रीराम ने शिव धनुष भंग किया तो मैदान जय श्रीराम से गूंज उठा। सिया ने रघुवीर को जयमाला पहनाई तो मिथिला में मंगल छा गया। एलईडी स्क्रीन, लाइट-साउंड ने दृश्यों को जीवंत बना दिया।
मंचीय लीला का शुभारंभ विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी, प्रांत संगठन मंत्री राजेश कुमार, वृंदावन के मंत्री सतीश जी और ज्वाइंट कमिश्नर जीएसटी पल्लव सक्सेना ने स्वरूपों की आरती करके किया। बड़े दिनेश जी ने कहा राम चरित्र को जीवन में उतारना ही रामचरित मानस का मर्म है।
अतिथियों का स्वागत रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल महामंत्री राजीव अग्रवाल ने किया। संचालन उपाध्यक्ष संजय तिवारी ने किया।
लीला में विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को दशरथ से मांगकर ले गए, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार हुआ। पुष्प वाटिका में राम-सीता के नयन मिले, फिर जानकी ने गौरा पूजन कर राम को वर रूप में मांगा। स्वयंवर में राजा धनुष न उठा सके, गुरु आज्ञा से राम ने सहजता से धनुष उठाकर भंग किया। ध्वनि-प्रकाश से मंच रोमांचित हो उठा, कोल्ड आतिशबाजी हुई।
लीला से पूर्व बारहद्वारी से राम-लक्ष्मण की घोड़ा सवारी और जानकी की रथ सवारी रावतपाड़ा, जौहरी बाजार होते हुए जनकपुरी पहुंची, मार्ग में पुष्पवर्षा हुई।
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